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New Delhi: ‘पंजाब सरकार का आचरण अलोकतांत्रिक और संविधान विरोधी’- शिवराज सिंह चौहान

संसद के कानूनों का सम्मान सभी राज्यों की संवैधानिक जिम्मेदारी...

By: Abhinav Tiwari 
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New Delhi: ‘पंजाब सरकार का आचरण अलोकतांत्रिक और संविधान विरोधी’- शिवराज सिंह चौहान

केन्द्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज भोपाल में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान पंजाब सरकार और विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में संसद द्वारा पारित कानूनों के खिलाफ प्रस्ताव लाना संविधान, संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विपरीत है। केन्द्रीय मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संसद के कानूनों को मानना केंद्र और राज्यों-दोनों की संवैधानिक जिम्मेदारी है।

संसद के कानूनों का विरोध संघीय ढांचे के खिलाफ

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह बेहद आश्चर्यजनक है कि पंजाब विधानसभा के एक दिन के सत्र में संसद के कानूनों के विरोध का एजेंडा रखा गया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि विधानसभा संसद के कानूनों के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने लगे, तो क्या आगे चलकर जिला पंचायत, जनपद पंचायत या ग्राम पंचायत भी राज्य के कानूनों के खिलाफ प्रस्ताव पारित करेंगी? उन्होंने कहा कि यह सोच संघीय ढांचे की भावना के विरुद्ध है और लोकतंत्र को कमजोर करती है।

राहुल गांधी पर निशाना, अंध विरोध की राजनीति का आरोप

केन्द्रीय मंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए कहा कि वे कल्पना लोक में रहते हैं और देश की जमीनी हकीकत से कटे हुए हैं। बिना मंत्री परिषद और कैबिनेट के काम चलने जैसी बातें केवल भ्रम फैलाने का प्रयास हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और विपक्षी दल केवल अंध विरोध की राजनीति कर रहे हैं, जिसका लोकतांत्रिक मूल्यों से कोई संबंध नहीं है।

पंजाब में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

शिवराज सिंह चौहान ने पंजाब सरकार पर मनरेगा सहित विभिन्न योजनाओं में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राज्य में हजारों भ्रष्टाचार के मामले सामने आए हैं, लेकिन न तो दोषियों पर कार्रवाई हुई और न ही गबन की गई राशि की वसूली की गई। उन्होंने बताया कि पंजाब की 13,304 ग्राम पंचायतों में से केवल 5,915 में ही सोशल ऑडिट हुआ, जिसमें करीब 10,653 वित्तीय अनियमितताओं के मामले सामने आए, लेकिन किसी पर भी ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

उन्होंने आरोप लगाया कि सड़कों और नहरों की सफाई के नाम पर ओवर-एस्टिमेट बनाकर धन निकाला गया, जबकि केंद्रीय टीम की जांच के बाद भी वसूली की सिफारिशों पर अमल नहीं हुआ। मनरेगा में ऐसी गतिविधियों पर भी खर्च किया गया, जो नियमों में अनुमन्य नहीं थीं। मजदूरों को मजदूरी न मिलने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं, लेकिन राज्य सरकार आंख मूंदे बैठी है।

ममता बनर्जी पर तंज, धर्म को राजनीति से जोड़ने का आरोप

केन्द्रीय मंत्री ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी तंज कसते हुए कहा कि कुछ लोगों को मंदिर और धार्मिक आस्था केवल चुनाव के समय ही याद आती है। उन्होंने कहा कि जब धार्मिक संस्थाओं पर हमले होते हैं, तब यही लोग चुप्पी साध लेते हैं। चुनाव आते ही त्रिपुण्ड लगाने, हनुमान चालीसा और दुर्गा सप्तशती का पाठ शुरू हो जाता है। आस्था का सम्मान होना चाहिए, न कि उसे राजनीति का औजार बनाया जाना चाहिए।

संसद की बहस से भागती है कांग्रेस

शिवराज सिंह चौहान ने संसद में कांग्रेस के रवैये को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए कहा कि इतने महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष का लोकसभा से गायब रहना संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाता है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर लोकसभा और राज्यसभा में आठ घंटे से अधिक चर्चा हुई, लेकिन विपक्ष चर्चा सुनने और जवाब स्वीकार करने को तैयार नहीं था।

उन्होंने कहा कि संसद में बहस से भागकर बाहर झूठा नैरेटिव गढ़ना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। सरकार का उद्देश्य श्रमिकों, किसानों और गांवों के समग्र विकास को सुनिश्चित करना है, और भ्रम फैलाने या हंगामा करने से सच्चाई नहीं बदली जा सकती।

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