बुरहानपुर में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के संबंध में जनसुझाव प्राप्त करने के उद्देश्य से संयुक्त जिला कार्यालय के सभाकक्ष में जनपरामर्श बैठक आयोजित की गई। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा यूसीसी लागू करने की दिशा में शुरू की गई प्रक्रिया के तहत गठित उच्च स्तरीय समिति के सदस्यों ने विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों एवं नागरिकों से सुझाव प्राप्त किए।
बैठक को संबोधित करते हुए समिति सदस्य एवं शिक्षाविद् डॉ. शोभा पैठणकर ने कहा कि समान नागरिक संहिता का उल्लेख भारतीय संविधान के नीति निदेशक तत्वों के अनुच्छेद-44 में किया गया है। इसका उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समानता, न्याय और कल्याण सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि समय के साथ समाज में बदलाव आते हैं और कानूनों में भी आवश्यक सुधार किए जाते हैं ताकि वे वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप बने रहें।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और दत्तक ग्रहण जैसे विषय अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के तहत संचालित होते हैं। यूसीसी का उद्देश्य इन विषयों पर सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था स्थापित करना है।
डॉ. पैठणकर ने कहा कि राज्य सरकार नागरिकों के सुझावों को प्राथमिकता देते हुए जनसंवाद की प्रक्रिया चला रही है। प्राप्त सुझावों के आधार पर यूसीसी का प्रारूप तैयार किया जाएगा, जिसे आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के बाद विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने नागरिकों से वेबसाइट ucc.mp.gov.in के माध्यम से भी अपने सुझाव दर्ज कराने का आग्रह किया।
उच्च स्तरीय समिति के सदस्य प्रो. गोपाल शर्मा ने यूसीसी के सामाजिक, प्रशासनिक और कानूनी पक्षों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी निर्णय से पहले व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करना चाहती है ताकि सभी वर्गों की राय को शामिल किया जा सके। उन्होंने महिलाओं के अधिकार, सामाजिक न्याय और संवैधानिक प्रावधानों से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की।
विधायक श्रीमती अर्चना चिटनिस ने यूसीसी को नागरिक हित में बताते हुए इसका समर्थन किया। उन्होंने विवाह के साथ-साथ लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीयन और उत्तराधिकार संबंधी नियमों में स्पष्टता लाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ कानूनों में भी सुधार आवश्यक है।
वहीं नेपानगर विधायक सुश्री मंजू दादू ने जनजातीय क्षेत्रों की सामाजिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं को रोकने और महिला-पुरुष समानता को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने विधवा महिलाओं के अधिकारों के संरक्षण को भी प्राथमिकता देने की बात कही।
कलेक्टर हर्ष सिंह ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेशभर में व्यापक स्तर पर जनपरामर्श अभियान चला रही है ताकि विभिन्न समुदायों और क्षेत्रों की राय नीति निर्माण में शामिल की जा सके। उन्होंने कहा कि सभी नागरिकों को समान अवसर और अधिकार मिलना ही लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती का आधार है।
पुलिस अधीक्षक आशुतोष बागरी ने यूसीसी के संबंध में सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि नागरिक जीवन से जुड़े मामलों में स्पष्ट और प्रभावी कानून समाज में व्यवस्था और न्याय सुनिश्चित करते हैं।
बैठक के दौरान उपस्थित नागरिकों, सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिभागियों ने अनेक सुझाव प्रस्तुत किए। प्रमुख सुझावों में विवाह और तलाक के लिए सभी नागरिकों हेतु समान कानून, महिलाओं के उत्तराधिकार अधिकारों में समानता, बहुपति एवं बहुपत्नी प्रथा पर स्पष्ट प्रावधान तथा विवाह पंजीयन को अनिवार्य बनाने की मांग शामिल रही।
इसके अलावा लिव-इन रिलेशनशिप से जन्मे बच्चों के अधिकारों और उत्तराधिकार संबंधी प्रावधानों को स्पष्ट करने, बेटा-बेटी को समान संपत्ति अधिकार देने तथा कलाकारों सहित सभी वर्गों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने की बात भी सामने आई।

बैठक में यह सुझाव भी दिया गया कि यूसीसी का अंतिम प्रारूप सरल और स्पष्ट भाषा में तैयार किया जाए ताकि समाज का हर वर्ग इसे आसानी से समझ सके। साथ ही हिंदी और अंग्रेजी के अलावा स्थानीय भाषाओं एवं बोलियों में भी इसका अनुवाद उपलब्ध कराने की मांग की गई, जिससे नागरिक अपने अधिकारों और दायित्वों की बेहतर जानकारी प्राप्त कर सकें।
जनपरामर्श बैठक में प्राप्त सुझावों से स्पष्ट हुआ कि यूसीसी को लेकर समाज के विभिन्न वर्ग अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज करा रहे हैं। राज्य सरकार का प्रयास है कि सभी हितधारकों के विचारों को समाहित करते हुए ऐसा प्रारूप तैयार किया जाए जो न्यायसंगत, व्यावहारिक और जनहितकारी हो।