राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिव्यांगों के सशक्तिकरण को समाज और सरकार की जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि दिव्यांग होना कोई कमजोरी नहीं, बल्कि एक विशेष परिस्थिति है, जिसके लिए सही समर्थन की जरूरत है। उन्होंने मंगलवार को दिव्यांगजनों के लिए सहानुभूति, समावेशिता और समान अवसरों की आवश्यकता पर जोर दिया और समाज से इस विषय में अपने नजरिए को बदलने की बात कही।
राष्ट्रपति मुर्मू के कहा कि “हम एक ऐसी दुनिया बनाएं, जो दिव्यांगों को बराबरी और इज्जत दे। उन्हें दया नहीं, बल्कि सहानुभूति चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि दिव्यांगजनों को खास ध्यान नहीं, बल्कि स्वाभाविक प्यार और सम्मान की जरूरत है। उनका मानना है कि समाज को दिव्यांगों की भागीदारी को महत्व देना चाहिए।
राष्ट्रपति मुर्मू ने दिव्यांगों की विभिन्न क्षेत्रों में की गई उपलब्धियों की भी सराहना की, खासकर खेलों में। उन्होंने बताया कि 2012 के पैरालिंपिक में भारत ने केवल एक पदक जीता था, जबकि 2024 में दिव्यांगों के प्रति बढ़ती जागरूकता और समर्थन के कारण भारत के खिलाड़ियों ने 29 पदक जीते। यह दिव्यांगों के प्रति समाज की बढ़ती संवेदनशीलता है।
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि दिव्यांगों के लिए ऐसी सुविधाएं विकसित की जानी चाहिए, जिन्हें वे आसानी से इस्तेमाल कर सकें। “सुगम्य भारत अभियान” का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विभिन्न मंत्रालय और विभाग मिलकर दिव्यांगों के लिए पहुंच में सुधार लाने के लिए काम कर रहे हैं।
समाज में समान अवसर और बिना किसी रुकावट के पहुंच को सुनिश्चित करना किसी भी समाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और दिव्यांगों के जीवन को आसान बनाना इसी दिशा में एक बड़ा कदम है। राष्ट्रपति मुर्मू ने देशवासियों से अपील की है कि वे दिव्यांगों के प्रति अपनी सोच को बदलें।
This Post is written by Shreyasi Gupta