रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी को आज सुबह 2018 के एक मामले में गिरफ्तार किया गया है। मुंबई पुलिस ने आज सुबह उन्हें उनके आवास से गिरफ्तार किया है।
दूसरी और अर्नब गोस्वामी का आरोप है कि पुलिस ने उनके साथ मारपीट की। रिपब्लिक टीवी ने अर्नब के घर के लाइव फुटेज भी दिखाए, जिसमें पुलिस और अर्नब के बीच झड़प होती दिख रही है। अर्नब गोस्वामी के खिलाफ हुई इस कार्रवाई की बीजेपी और केंद्रीय मंत्रियों ने कड़ी निंदा की है।
We condemn the attack on press freedom in #Maharashtra. This is not the way to treat the Press. This reminds us of the emergency days when the press was treated like this.@PIB_India @DDNewslive @republic
— Prakash Javadekar (@PrakashJavdekar) November 4, 2020
प्रकाश जावड़ेकर ने ट्वीट किया, ‘हम महाराष्ट्र में प्रेस की आजादी पर हमले की निंदा करते हैं। यह प्रेस के साथ व्यवहार का तरीका नहीं है। यह इमरजेंसी के दिनों की याद दिलाता है, जब प्रेस के साथ ऐसा व्यवहार किया गया था।
Those in the free press who don’t stand up today in support of Arnab, you are now tactically in support of fascism. You may not like him, you may not approve of him,you may despise his very existence but if you stay silent you support suppression. Who speaks if you are next ?
— Smriti Z Irani (@smritiirani) November 4, 2020
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने ट्वीट किया, ‘फ्री प्रेस में जो लोग आज अर्नब के समर्थन में नहीं खड़े हैं, वे फासीवाद के समर्थन में हैं। आप उसे पसंद नहीं कर सकते हैं, आप उसे स्वीकार नहीं कर सकते हैं, आप उसके अस्तित्व को तुच्छ समझ सकते हैं, लेकिन अगर आप चुप रहते हैं तो आप दमन का समर्थन करते हैं। अगली बार आप पर कार्रवाई हुई तो कौन बोलेगा ?
आपातकाल 1977 में ख़त्म हुआ पर मानसिकता बनी रही।
आपातकाल का समर्थन करनेवाली कांग्रेस- शिवसेना साथ आने के बाद उसी मानसिकता का दर्शन दे रहे है।
सरकार विरोधी हर आवाज को कुचलने का प्रयास लोकतंत्र पर धब्बा है। भारत ने एक ही बात सीखी है, हर ज़ोर ज़ुल्म की टक्कर में संघर्ष हमारा नारा है।— Devendra Fadnavis (@Dev_Fadnavis) November 4, 2020
फड़नवीस ने लिखा, आपातकाल 1977 में ख़त्म हुआ पर मानसिकता बनी रही। आपातकाल का समर्थन करनेवाली कांग्रेस- शिवसेना साथ आने के बाद उसी मानसिकता का दर्शन दे रहे है। सरकार विरोधी हर आवाज को कुचलने का प्रयास लोकतंत्र पर धब्बा है। भारत ने एक ही बात सीखी है, हर ज़ोर ज़ुल्म की टक्कर में संघर्ष हमारा नारा है।