गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल करने के बाद डॉ. संजयन त्रिपाठी अब समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरने जा रहे हैं। सपा का समर्थन मिलने के बाद उनका दोबारा नामांकन चर्चा का विषय बन गया है। नामांकन से पहले डॉ. त्रिपाठी ने शिक्षक हितों से जुड़े कई मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने पुरानी पेंशन योजना की बहाली, वित्तविहीन शिक्षकों के लिए मानदेय और मदरसा शिक्षकों के भत्तों को अपने प्रमुख चुनावी मुद्दों में शामिल किया है।
डॉ. संजयन त्रिपाठी का कहना है कि शिक्षक समाज की लंबे समय से चली आ रही मांगों को मजबूती से उठाना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने पुरानी पेंशन योजना यानी OPS की बहाली को चुनावी एजेंडे में सबसे ऊपर रखा है। इसके अलावा वित्तविहीन शिक्षकों के लिए सम्मानजनक मानदेय और मदरसा शिक्षकों के लिए निर्धारित भत्तों की मांग भी उन्होंने उठाई। उनका सवाल है कि यदि अन्य वर्गों के कर्मचारियों के लिए अलग-अलग प्रकार की सहायता और भत्ते की व्यवस्था हो सकती है, तो मदरसा शिक्षकों को उनके अधिकार क्यों नहीं मिलने चाहिए।
डॉ. संजयन त्रिपाठी ने अपने राजनीतिक अभियान के दौरान मिले समर्थन को लेकर भी बड़ा दावा किया। उनके मुताबिक, शिक्षकों के मुद्दों को डिजिटल माध्यम से उठाने के बाद बीजेपी से जुड़े कई पुराने कार्यकर्ताओं ने उनसे संपर्क किया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से बीजेपी से जुड़े कुछ कार्यकर्ता संगठन के भीतर अपनी बात खुलकर नहीं रख पा रहे थे। ऐसे लोगों को उनकी आवाज में अपनी बात नजर आई और उन्होंने व्यक्तिगत स्तर पर उनका समर्थन किया।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में बड़े नेताओं की सक्रियता पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि अंतिम फैसला राजनीतिक मंचों पर मौजूद नेताओं से नहीं, बल्कि मतदान केंद्र तक पहुंचने वाले शिक्षक मतदाताओं से होगा।उन्होंने शिक्षक मतदाताओं की राजनीतिक भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि शिक्षक समाज खुद जनप्रतिनिधियों का चुनाव करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में शिक्षक मतदाताओं के निर्णय को किसी भी स्थिति में कमतर नहीं आंका जाना चाहिए।

डॉ. संजयन त्रिपाठी ने पिछले करीब 18 वर्षों के राजनीतिक नेतृत्व और शिक्षक हितों से जुड़े कामकाज पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि लंबे समय तक सदन में प्रतिनिधित्व रहने के बावजूद शिक्षकों की कई बुनियादी मांगें अब तक पूरी नहीं हो सकी हैं। उनका कहना है कि इस बार शिक्षक मतदाता पिछले वर्षों के कामकाज का मूल्यांकन करेगा और अपने मत के जरिए जवाब देगा।
सपा में शामिल होने के बाद बीजेपी समर्थक माने जाने वाले लोगों के साथ उनके संबंधों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। इस पर डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि राजनीतिक विचारधारा अलग होने के बावजूद व्यक्तिगत रिश्तों को खत्म नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने अपने करीब 26 वर्षों के व्यक्तिगत संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि राजनीतिक दूरी इन रिश्तों को प्रभावित नहीं करेगी। उनका मानना है कि व्यक्तिगत और आत्मीय रिश्तों को राजनीतिक प्रतिस्पर्धा से अलग रखा जाना चाहिए।
सपा के बैनर तले शिक्षक हितों पर फोकस
डॉ. संजयन त्रिपाठी के सपा प्रत्याशी बनने के बाद गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। एक ओर उनके सामने राजनीतिक दलों का संगठनात्मक आधार है, वहीं दूसरी ओर वह शिक्षक हितों और लंबित मांगों को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर शुरुआत करने के बाद सपा के समर्थन के साथ मैदान में उतरे डॉ. त्रिपाठी को शिक्षक मतदाताओं का कितना समर्थन मिलता है और उनका अभियान चुनावी समीकरण को किस हद तक प्रभावित करता है।