भारत-पाकिस्तान के बीच साल 1971 में हुए युद्ध को 50 साल पूरे हो गए हैं। इस दिन को ‘विजय दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। इस मौके पीएम मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, अमित शाह, राहुल गाँधी संग कई नेताओ ने शुभकामनाएं दी है।
इस मौके पर दिल्ली स्थित वॉर मेमोरियल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘स्वर्णिम विजय मशाल’ प्रज्जवलित की और जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। वहीं कोलकाता स्थित सेना के कमान मुख्यालय फोर्ट विलियम में भी कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस मौके पर पूर्वी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान ने कहा कि लद्दाख में चीन के साथ हुई झड़प के बाद कमान क्षेत्र में कोई बड़ी घुसपैठ नहीं हुई है।
‘विजय दिवस’ कार्यक्रम में बोलते हुए लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान ने कहा, ‘मैं कहना चाहता हूं कि लद्दाख में चीन के साथ हुई झड़प के बाद से पूर्वी कमान क्षेत्र में कोई बड़ी घुसपैठ या सामना नहीं हुआ है। गलवां घाटी में हुई घटना के बाद हमारे और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के बीच एलएसी पर पारस्परिक विश्वास कम हुआ है और इसे फिर से स्थापित होने में समय लगेगा।’
गौरतलब है कि गलवां घाटी में हुई घटना के बाद से एशिया के दो सबसे बड़े देशों के बीच सीमा पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई है। गलवां घाटी में हुई घटना में 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे। हालांकि, इस घटना को लेकर चीन ने अपने हताहत सैनिकों की संख्या नहीं बताई थी, लेकिन एक खुफिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि चीन के 40 से अधिक सैनिक हताहत हुए थे।
जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में चिनार कॉर्प्स के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल बीएस राजू ने इस मौके पर कहा, ‘पाकिस्तान घाटी के युवाओं को गुमराह करने के प्रयास कर रहा है। यहां की अधिकांश आबादी भारत पर विश्वास करती है। बड़ी संख्या में गुमराह युवा वापस मुख्यधारा में आ गए हैं और इससे मुझे बहुत उम्मीद है।’
वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के 50 साल पूरा होने के अवसर पर राजधानी दिल्ली स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल की अमर ज्योति से ‘स्वर्णिम विजय मशाल’ को प्रज्ज्वलित किया। पीएम मोदी के अलावा यहां पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बिपिन रावत, और तीनों सेनाओं के प्रमुख मौजूद रहे।
साथ ही पीएम मोदी ने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की 50वीं वर्षगांठ पर राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उनके साथ थलसेना प्रमुख एमएम नरवणे, वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया और नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह ने भी जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
आप को बता दे कि साल 1971 में भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ था। इस युद्ध का ही परिणाम था कि भारतीय सेना ने पाकिस्तान को दो टुकड़ों में बांट दिया जहां एक देश का नाम बांग्लादेश पड़ा।
इस युद्ध में भारतीय सेना ने अपने पराक्रम का लोहा मनवाया। साथ ही यह दुनिया के उन गिने-चुने युद्धों में से एक था। इस संघर्ष में करारी हार झेलने के बाद पाकिस्तान के 93 हजार सैनिकों को भारत के सामने आत्मसमर्पण करना पड़ा था।
इस गौरव गाथा की ही याद में भारत में हर साल 16 दिसंबर को विजय दिवस मनाया जाता है। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय समर स्मार्क पर सैनिकों को श्रद्धांजलि देने पहुंचे। यहां उन्होंने 4 स्वर्णिम मशाल भी जलाए।
बता दें कि इन चारों मशालों को देश के कोने-कोने तक ले जाया जाएगा। बता दें कि जब पीएम मोदी सैनिकों को श्रद्धांजलि दे रहे थे उस दौरान लड़ाकू विमान राजपथ पर फ्लाई पास्ट कर रहे थे।