जिले के गुनौर कस्बे में संचालित नेताजी सुभाष चंद्र बोस बालिका छात्रावास में शनिवार देर शाम उस समय हंगामे की स्थिति बन गई, जब छात्राओं ने खराब और अस्वच्छ भोजन को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। छात्राओं का कहना है कि छात्रावास में लंबे समय से भोजन की गुणवत्ता बेहद खराब है, जिसकी कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई ठोस सुधार नहीं हुआ।
छात्राओं ने आरोप लगाया कि छात्रावास में कार्यरत रसोइये अपने लिए अलग और अच्छा भोजन बनाते हैं, जबकि छात्राओं को घटिया, गंदा और अधपका खाना परोसा जाता है। उनका कहना है कि कभी-कभी रोटियां फेंककर दी जाती हैं और व्यवहार भी अपमानजनक होता है। इससे न सिर्फ मानसिक तनाव बढ़ रहा है, बल्कि स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।
छात्रावास प्रभारी संदीपनी सिंह ने बताया कि जब रसोइयों को व्यवस्था सुधारने के लिए कहा जाता है, तो वे उल्टा विवाद करने लगती हैं। पूरे मामले की जानकारी डीपीसी पन्ना को दे दी गई है और आगे से स्वच्छ व गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया है।
घटना के दौरान छात्रावास में रहने वाली छात्राएं बाहर आकर बैठ गईं और व्यवस्था के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने अपने अभिभावकों को फोन कर हालात बताए। इसके बाद कुछ स्थानीय लोग और कांग्रेस नेता भी मौके पर पहुंचे। स्थानीय नेता सनी राजा से मिलकर छात्राएं रोते हुए अपनी समस्याएं बताती नजर आईं।
सूचना मिलने पर टीआई माधवी अग्निहोत्री और तहसीलदार रत्नाराशि पांडे मौके पर पहुंचीं और अंदर जाकर जांच की। हालांकि, बाद में तहसीलदार का बयान सामने आया कि “छात्राओं का आरोप है कि खाना गंदा मिलता है और व्यवहार ठीक नहीं है, लेकिन कोई बड़ी बात नहीं है।”
इस बयान के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। सवाल उठ रहे हैं कि यदि खाना गंदा है और व्यवहार खराब है, तो और किस स्तर की अव्यवस्था का इंतजार किया जा रहा है? क्या प्रशासन किसी अनहोनी या बड़ी घटना के बाद ही कार्रवाई करेगा?
पन्ना जिले में छात्रावासों के निरीक्षण के लिए प्रशासनिक अधिकारियों की टीम गठित होने के बावजूद जमीनी स्तर पर लापरवाही सामने आ रही है। यह मामला एक बार फिर छात्रावासों में रहने वाली छात्राओं की सुरक्षा, पोषण और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता से कार्रवाई करता है और छात्राओं की शिकायतों का व्यावहारिक समाधान कब तक सुनिश्चित किया जाता है।