मशहूर वायलिन वादक और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित टीएन कृष्णन सोमवार शाम चेन्नई में निधन हो गया। टीएन कृष्णन ने 92 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। कृष्णन रागों के लिए विशेष तौर पर जाने जाते थे। अपने संगीत में उन्होंने हर तरह के रागों को तवज्जो दी।
वायलिन के जरिए वे प्राचीन रागों को जीवंत कर देते थे। अपने जीवन के अंतिम दिनों तक वे रागों का प्रदर्शन करते रहे। टीएन कृष्णन बीमार नहीं थे, सोमवार को शाम को उन्हें अचानक बेचैनी हुई और उनका निधन हो गया। ये जनाकारी चेन्नई के संगीत प्रेमी और संगीत कार्यक्रमों के आयोजक रामनाथन अय्यर ने दी।
रामनाथन अय्यर टीएन कृष्णन के परिवार के करीबी हैं, उन्होंने कहा कि पिछले महीने ही टीएन कृष्णन ने अपना जन्मदिन मनाया था। टीएन कृष्णन ने बचपन से ही संगीत सीखा था।
टीएन कृष्णन के पिता का नाम ए नारायण अय्यर था और मां का नाम अम्मीनी अम्मल था। टीएन कृष्णन ने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा अपने पिता ए नारायण अय्यर से ली थी। दोनों बच्चे भी वायलिन वादक टीएन कृष्णन का जन्म केरल में 6 अक्टूबर 1928 में हुआ था।
टीएन कृष्णन की शादी कमला कृष्णन से हुई थी और उनके दो बच्चे हैं, विजी कृष्णन नटराजन और श्रीराम कृष्णन। उनके दोनों ही बच्चे भी वायलिन वादक ही हैं। यही नहीं उनकी बहन एन. राजम हिंदुस्तानी भी प्रसिद्ध वायलिन वादक हैं। टीएन कृष्णन ने 1939 में तिरुवनंतपुरम में अपना सोलो वायलिन कॉन्सर्ट दिया था।
फिर टीएन कृष्णन एलेप्पी के.पार्थसारथी द्वारा संगीत के महान संरक्षक और बाद में सेमीमागुड़ी श्रीनिवास अय्यर के साथ जुड़ गए थे। अपनी वायलिन की धुनों को लोगों की दिल जीत लेने वाले कृष्णन को 1974 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। 2006 में अकादमी की संगीत नाटक अकादमी फैलोशिप बने।
टीएन कृष्णन को 1980 में संगीता कलानिधि प्राप्त की। कृष्णन को 1973 में पद्मश्री और 1992 में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। इसके अलावा 1999 में द इंडियन फाइन आर्ट्स सोसाइटी की ओर से संगीता कलसिकमणि पुरस्कार से नवाजा गया था।
आपको बता दें कि टीएन कृष्णन चेन्नई के एक संगीत कॉलेज में संगीत के प्रोफेसर थे और बाद में वह दिल्ली विश्वविद्यालय में स्कूल ऑफ म्यूजिक एंड फाइन आर्ट्स के डीन बने थे।