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बिजली बिल को लेकर ओवैसी ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना, पढ़े

By: RNI Hindi Desk 
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बिजली बिल को लेकर ओवैसी ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना, पढ़े

दिल्ली और आसपास के बॉर्डर पर डटे किसानों का विरोध केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के साथ-साथ किसान बिजली कानून में प्रस्तावित संशोधन का भी विरोध कर रही हैं। इस बिल का विरोध विपक्ष भी कर रहा है।

एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी का कहना है कि इस बिल को लेकर सरकार जो दावा कर रही है, सच्चाई उसके विपरित है। किसानों को डर है कि प्रस्तावित संशोधन से बिजली पर उन्हें मिलनी वाली सब्सिडी खत्म हो जाएगी।

आप को बता दे कि विपक्ष भी बिजली कानून में संशोधन का विरोध कर रहा है। एआईएमआईएम के प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया है कि सरकार किसानों से रियायती दर पर बिजली का हक छीनना चाहती है।

एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी का कहना है कि बिजली बिल के जरिए क्रॉस सब्सिडी से दूर करने का प्रस्ताव है। कई राज्य सरकारें किसानों को मुफ्त बिजली देती हैं, प्रस्तावित बिजली बिल इसे बदलना चाहता है और किसानों को बिजली के लिए उच्च दर का भुगतान करवाना चाहता है। मैंने मई में इस बिल के खिलाफ लिखा था।

ओवैसी ने कहा कि वर्तमान में गरीब परिवार अनुदानित दरों का भुगतान करते हैं और इसकी लागत औद्योगिक / वाणिज्यिक उपयोगकर्ताओं से वसूल की जाती है। अब, भाजपा किसानों, गरीब लोगों और अन्य घरेलू उपयोगकर्ताओं को बड़े व्यवसायों के समान भुगतान कराना चाहती है।

ओवैसी ने मंगलवार को अपने ट्वीट में लिखा, “यह सरकार जो कहती है, सच उसके विपरीत होता है। बिजली बिल के जरिये क्रॉस सब्सिडी से दूर करने का प्रस्ताव है। कई राज्य किसानों को मुफ्त बिजली दे रहे हैं, यह बिल इसे बदलना चाहता है और किसानों को बिजली के लिए अधिक भुगतान करवाना चाहता है।”

उन्होंने अगले ट्वीट में कहा, “मौजूदा वक्त में गरीब परिवार रियायती दरों पर भुगतान कर रहे हैं और इसकी लागत की वसूली औद्योगिक/वाणिज्यिक उपयोक्ताओं से की जा रही है। अब बीजेपी चाहती है कि किसान, गरीब लोग और अन्य घरेलू उपयोक्ता भी बड़े कारोबारियों की तरह ही भुगतान करें।”

दरअसल, किसानों की चिंता सता रही है कि बिजली कानून में संशोधन के जरिये बिजली सब्सिडी की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की योजना है। सरकार ने सोमवार को कहा कि संशोधन को लेकर किसानों की चिंता का कोई कारण नहीं है।

आपको बता दें कि किसान बिजली बिल का विरोध कर रहे हैं. किसान यूनियनों का कहना है कि अगर यह बिल कानून बन जाता है तो वे मुफ्त बिजली की सुविधा खो देंगे। उनके मुताबिक ये संशोधन बिजली के निजीकरण को बढ़ावा देगा और पंजाब में किसानों को दी जाने वाली मुफ्त बिजली सुविधा बंद करा देगा।

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