मध्य प्रदेश के पन्ना स्थित श्री श्री 1008 श्री जुगल किशोर सरकार सप्तनिधि धाम में आयोजित 15 दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ एवं गुरु पूर्णिमा महोत्सव के चौथे दिन भक्तिमय वातावरण देखने को मिला। श्रीधाम वृंदावन के अग्रोमलिक पीठाधीश्वर पूज्य श्री राजेंद्र दास जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं और श्रीमद्भागवत के प्रेरणादायक प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु सुबह से ही पंडाल में पहुंच गए।
अपने प्रवचन में पूज्य महाराज ने कहा कि भगवान की प्राप्ति का सबसे सरल मार्ग निष्काम भक्ति, पूर्ण समर्पण और गुरु के प्रति अटूट विश्वास है। उन्होंने बताया कि जब मनुष्य अहंकार का त्याग कर सच्चे मन से प्रभु का स्मरण करता है, तब भगवान स्वयं उसके जीवन का मार्गदर्शन करते हैं। उन्होंने श्रीमद्भागवत को मानव जीवन के लिए धर्म, भक्ति और मोक्ष का दिव्य मार्गदर्शक ग्रंथ बताया।
कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य प्रसंग का मनोहारी वर्णन किया गया। जैसे ही जन्मोत्सव का प्रसंग आया, पूरा कथा स्थल “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन, आरती और पुष्पवर्षा के साथ श्रीकृष्ण जन्मोत्सव को उल्लासपूर्वक मनाया। महिलाओं, युवाओं और बच्चों की उत्साहपूर्ण सहभागिता से पूरा परिसर भक्तिमय माहौल में रंग गया।
इस अवसर पर पूर्व मंत्री एवं पन्ना विधायक बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने नगर के प्रमुख और प्राचीन मंदिरों के पुजारियों को शॉल, श्रीफल और सम्मान सामग्री भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि पन्ना केवल हीरों की नगरी नहीं, बल्कि संतों और देवस्थानों की पावन भूमि भी है। ऐसे धार्मिक आयोजन सनातन संस्कृति और भारतीय संस्कारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

पूज्य राजेंद्र दास जी महाराज और महंत श्री किशोर दास जी महाराज ने पन्ना के प्रमुख मंदिरों में दर्शन-पूजन कर नगर की आध्यात्मिक गरिमा की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि श्री जुगल किशोर सरकार का दिव्य स्वरूप अत्यंत दुर्लभ है और पन्ना की भूमि वास्तव में देवभूमि के समान है। उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्म, सेवा और संस्कारों के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में टटिया आश्रम से पधारे पूज्य स्नेही शरण जी महाराज सहित लगभग 40 संत-महात्माओं ने सहभागिता की। इसके अलावा झिरकी बगिया वाले महंत जी, त्यागी जी महाराज और अन्य संतों की उपस्थिति ने आयोजन की आध्यात्मिक गरिमा को और बढ़ाया। मंच पर सभी संतों का सम्मान भी किया गया।