Home विचार पेज निर्भया केस: देश की बेटी को मिला इंसाफ, पढ़िए सात वर्षों में कब-कब क्या हुआ

निर्भया केस: देश की बेटी को मिला इंसाफ, पढ़िए सात वर्षों में कब-कब क्या हुआ

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मंगलवार को जब पटियाला हाउस कोर्ट ने निर्भया रेप केस के आरोपियों को लेकर फैसला सुनाया तो देशभर के लोगों ने राहत की सांस ली। शायद कहीं न कहीं निर्भया की आत्मा को भी शांती मिली होगी। इस मामले को लेकर पिछले 7 सालों से निर्भया की मां कोर्ट के चक्कर लगाते नहीं थकी और अंत में अपनी बेटी को न्याय दिलवाकर ही माना। लेकिन 16 दिसंबर 2012 की उस रात के बारे में आज भी सोचकर रुह कांप जाती है।

2012 में इलाज के दौरान निर्भया ने तोड़ा था दम

16 दिसंबर
वसंत विहार के पैरा मेडिकल की छात्रा के साथ एक नाबालिग समेत 6 लोगों ने चलती बस में पहले गैंग रेप किया और फिर उसके साथ मारपीट की गई। इस घटना को अंजाम देने के बाद बेखौफ दोषियों ने दोनों को बस से नीचे फेंक दिया और दोनों को कुचलकर मारने का प्रयास किया।

17 दिसंबर
पुलिस को जैसे ही इस केस के बारे में पता चला वो आरोपियों के तलाश में जुट गई और घटना के एक दिन बाद ही पुलिस ने 17 दिसंबर को मुख्य आरोपी समेत बस चालक राम सिंह और चार लोगों को पकड़ा। इन आरोपियों ने निर्भया के साथ इतनी दरिंदगी की थी कि, अब भी याद कर आखें नम हो जाती है। उस दौरान देशभर में इस घटना के सामने आते ही लोगों में गुस्सा भड़क उठा और जगह-जगह पर कैंडल मार्च किया गया और दोषियों को लेकर सजा की मांग होने लगी।

21 दिसंबर को इस गैंगरेप में शामिल पांचवें आरोपी को लेकर पता चला की वह नाबालिग है और उसकी उम्र साढ़े सत्रह वर्ष है। पुलिस ने उसे आनंद विहार बस अड्डा से गिरफ्तार किया और इसी दिन एक अन्य आरोपी अक्षय कुमार को भी पुलिस ने औरंगाबाद बिहार से गिरफ्तार किया।

22 दिसंबर वो दिन था जब पीड़िता निर्भया ने एसडीएम के सामने अस्पताल में अपने बयान दर्ज कराई। इसी के बाद 23 दिसंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने तेजी से सुनवाई के लिए स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया। 24 दिसंबर को सरकार ने इस तरह के मामलों में तेजी से सुनवाई और कानून बनाने के लिए एक कमेटी का गठन किया।

एक तरफ तो सरकार ने कमेटी का गठन कर दिया लेकिन वहीं, दूसरी तरफ देश भर में आक्रोश था कि निर्भया के दोषियों को जल्द से जल्द सजा दी जाए। मंदिर, मस्जिद से लेकर चर्च तक सबकी एक ही दुआ थी कि निर्भया ठीक हो जाए लेकिन कुदरत को शायद कुछ और ही मंजूर था और 27 दिसंबर को पीड़िता की बगड़ती हालत देखकर उसे इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया।

29 दिसंबर को सबकी आखें नम थी देश भर में शायद ही कोई ऐसा हो जिसकी आखों में आंसू न हो, सिंगापुर में इलाज के दौरान निर्भया ने दम तोड़ दिया। निर्भया की मौत के बाद देश से लेकर विदेश तक में लोगों के खून में एक अलग ही लहर दौड़ गई। हर कोई इन आरोपियों को जल्द से जल्द सजा की मांग करने लगा।

2013 में निर्भया के एक दोषी ने जेल में फांसी लगाकर की खुदकुशी

3 जनवरी को दिल्ली पुलिस ने पांच आरोपियों के खिलाफ हत्या, गैंगरेप, अप्राकृतिक यौनाचार, अपहरण एवं सबूत मिटाने का आरोप पत्र दाखिल किया। 2 फरवरी को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने पांच लोगों पर हत्या, गैंगरेप और लूट के मामलों में आरोप तय किए। 11 जुलाई को गैंगरेप के आरोपियों में से एक राम सिंह ने तिहाड़ जेल में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली।

25 अगस्त को नाबालिग पर फैसले की तारीख बढ़ाई गई और 31 अगस्त को नाबालिग को गैंगरेप व हत्या में तीन वर्ष की सजा सुनाई गई। इसके बाद 7 अक्टूबर को निचली अदालत से सजा पाए चार दोषियों में से विनय शर्मा और अक्षय ठाकुर ने सजा के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की और 10 अक्टूबर को चार आरोपी को दोषी करार दिया गया।

2014 में SC ने चारों आरोपियों को फांसी पर सुनवाई पूरी होने तक रोक लगा दी।

दुनिया को अलविदा कहे निर्भया को 2 वर्ष हो गए थे लेकिन उसके आरोपियों को अब भी सजा नहीं मिली थी। 13 मर्च को दिल्ली हाई कोर्ट ने चारों आरोपियों की फांसी की सजा को बरकरार रखने का फैसला सुनाया और दो आरोपियों ने 2 जून को HC के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। 14 जुलाई 2014 को सु्प्रीम कोर्ट ने चारों आरोपियों को फांसी पर सुनवाई पूरी होने तक रोक लगा दी।

2017 में फांसी की सजा बरकरार रखी गई

निर्भया केस में देरी होती गई और 2012 से 2017 आ गया लेकिन अब भी आरोपियों को सजा नहीं मिली थी। 5 मई को सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों की फांसी की सजा बरकरार रखी और 27 मार्च को SC में सुनवाई पूरी हुई और फैसला सुरक्षित रखा गया।

2018 में तुंरत फांसी याचिका को खारिज कर दिया

5 मई को निर्भया केस के आरोपियों ने गुहार लगाई कि, उनकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदला जाए। 9 जुलाई तक सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा बरकरार रखी और 13 दिसंबर को SC ने देषियों को तुरंत फांसी की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया।

2019 में एसए बोबडे ने खुद को इस मामले से किया अलग

12 दिसंबर को मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे ने इस मामले से खुद को अलग कर लिया और 18 दिसंबर को अक्षय की पुनर्विचार याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया और फांसी की सजा बरकरार रखी।

7 जनवरी 2020 डेथ वॉरंट जारी

आखिरकार वो दिन आ ही गया जिस दिन का देशभर के लोगों को इंतजार था। मंगलवार 3:30 बजे इस मामले पर सुनवाई शुरू हुई। पटियाला हाउस कोर्ट ने चारों दोषियों को डेथ वॉरंट जारी कर दिया। जिसके बाद चाारों तरफ खुशी की लहर दौर गई। इन चारों को 22 जनवरी की सुबह 7 बजे फांसी पर लटकाया जाएगा। इससे पहले दोषी मुकेश की मां ने जज से गुहार लगाई की उसके लाल का क्या होगा, उसपर रहम बख्से, तभी पिछले सात वर्षों से दोषियों के सजा की राह देख रही निर्भया की मां ने रोते हुए कहा कि, मैं भी एक मां हूं। इन चारों आरोपियों को 22 जनवरी की सुबह 7 बजे फांसी पर लटकाया जाएगा।

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