मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश की हैंडलूम और हस्तशिल्प गतिविधियां महिलाओं की दक्षता और रचनात्मक क्षमता का प्रभावी उपयोग करते हुए उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि मृगनयनी, विंध्या वैली, कबीरा और प्राकृत जैसे ब्राण्ड के विक्रय केन्द्रों का विस्तार जिला स्तर तक किया जाए और इनकी फ्रेंचाइजी निजी उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों और महिलाओं को उपलब्ध कराई जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लाड़ली बहनों को लूम और चरखे उपलब्ध कराकर उत्पादन प्रारंभ करने के लिए चयनित जिलों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए जाएं। इस क्षेत्र में निजी भागीदारी को भी प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रदेश के हैंडलूम और हस्तशिल्प उत्पादों की सोशल मीडिया के माध्यम से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सशक्त उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।
मुख्यमंत्री ने साड़ी पहनने की गौरवशाली भारतीय परंपरा को बढ़ावा देने के लिए इंदौर में आयोजित साड़ी वॉकथान जैसे आयोजनों को प्रदेश के अन्य शहरों में भी आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने रेशम उत्पादन गतिविधियों का विस्तार अन्य जिलों में करने और इसमें निजी सहभागिता बढ़ाने पर भी जोर दिया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मृगनयनी, विंध्या वैली, कबीरा और प्राकृत ब्राण्ड के उत्पादों को मध्यप्रदेश पर्यटन की इकाइयों, प्रमुख धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर आकर्षक ढंग से प्रदर्शित कर विक्रय किया जाए। साथ ही प्रदेश के विभिन्न उत्पादों के जीआई टैग से संबंधित जानकारी का एकीकृत संकलन तैयार करने के निर्देश भी दिए।
बैठक में जानकारी दी गई कि प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा महत्वपूर्ण अतिथियों को भेंट के रूप में दिए जाने हेतु प्रदेश के हेरिटेज महेश्वरी स्टोल का चयन किया गया है। यह स्टोल गोंड पेंटिंग और बेलमेटल से सुसज्जित लकड़ी के बॉक्स में प्रस्तुत किए जा रहे हैं। इनकी मांग विदेशी दूतावासों से भी प्राप्त हो रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि मां अहिल्यादेवी की 300वीं जयंती के अवसर पर महेश्वर किले पर उकेरे गए डिज़ाइनों के आधार पर मां अहिल्यादेवी को समर्पित 52 डिज़ाइन की साड़ियों का विशेष संग्रह विकसित किया जा रहा है। यह संग्रह प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय और वैश्विक मंच पर पहचान दिलाएगा।
बैठक में बताया गया कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के अंतर्गत 2568 ग्रामोद्योग इकाइयों को स्वीकृति दी गई, 63 करोड़ रुपये का अनुदान वितरित हुआ और बैंकों से 252 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत कराया गया, जिससे लगभग 6300 नए रोजगार सृजित हुए। कौशल उन्नयन कार्यक्रम में 1710 लोगों को प्रशिक्षण और 1197 को रोजगार मिला। विभाग द्वारा 10 करोड़ रुपये की सामग्री का उत्पादन और एम्पोरियम के माध्यम से 23 करोड़ रुपये का विक्रय किया गया।
भोपाल के जवाहर चौक और भोपाल हाट में नए एम्पोरियम शुरू किए गए। जिला स्तर पर 49 और राज्य स्तर पर 30 प्रदर्शनियों के साथ ही नई दिल्ली, मुंबई, रांची, कोलकाता और छत्तीसगढ़ में भी प्रदर्शनियां आयोजित की गईं। डिजिटल मीडिया के माध्यम से आउटरीच का लगातार विस्तार किया जा रहा है।
आगामी कार्ययोजना के तहत ग्वालियर तेलघानी केंद्र का उन्नयन, उज्जैन, देवास, सागर, महेश्वर और बुरहानपुर में खादी और चर्म सामग्री उत्पादन का विस्तार, भोपाल में बुटिक व हस्तकला आधारित सामान्य सुविधा केंद्र की स्थापना तथा बुनकरों के लिए ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही 1700 बुनकरों को प्रशिक्षण, 800 को उन्नत उपकरण, 270 मेलों व प्रदर्शनियों के आयोजन और खादी वस्त्र उत्पादन क्षमता को दुगुना करने का लक्ष्य तय किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लूम और चरखे आधारित गतिविधियों, माटीकला, टेराकोटा और खादी उत्पादन को बढ़ावा देकर 8 हजार नए रोजगार के अवसर सृजित किए जाएंगे। उन्होंने निर्देश दिए कि कुटीर और ग्रामोद्योग विभाग की ये पहलें प्रदेश की अर्थव्यवस्था, सांस्कृतिक पहचान और महिला सशक्तिकरण को नई ऊंचाइयों तक ले जाएं।