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कोरोना नहीं ये है दुनिया की सबसे पहली वैक्सीन जिसने मचाही थी सबसे ज्यादा तबाही

By: RNI Hindi Desk 
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कोरोना नहीं ये है दुनिया की सबसे पहली वैक्सीन जिसने मचाही थी सबसे ज्यादा तबाही

रिपोर्ट: गीतांजली लोहनी

नई दिल्ली: पूरा देश 16 मार्च के दिन नेशनल वैक्सीनेशन डे के रुप में मनाता है। इस तारीख को पढ़ते ही आपके ध्यान में क्या ये आया कि आखिर 16 मार्च को ही क्यों इसे मनाया जाता है? तो चलिए आज हम आपको बताते है कि आखिर इसी दिन ही क्यों मनाया जाता है नेशनल वैक्सीनेशन डे।

दरअसल, इन दिनों कोरोना वैक्सीन की चर्चा हर जगह हो रही है। और नेशनल वैक्सीनेशन डे से एक दिन पहले यानी 15 मार्च को ही भारत में कोरोना वैक्सीन लेने वालों की संख्या 3 मिलियन पार कर गई। एक बार आंकड़ों में नजर डाले तो पूरी दुनिया में अभी तक कोरोना महामारी से मरने वाले लोगों की संख्या 26 लाख पार कर चुकी है। ऐसे में नेशनल वैक्सीनेशन डे के दौरान ही 3 मिलियन लोगों को डोज मिलना भारत के लिए बड़ी बात है। लेकिन इससे इतर क्या आप जानते है कि कोरोना से पहले किस बीमारी ने भारी तबाही मचाई थी कि दुनिया का पहला वैक्सीन बनाना पड़ा?

भारत में सबसे पहली बार सन् 1995 में 15 मार्च के दिन पोलियो ड्राप दिया गया था। इस ओरल वैक्सीन के कारण 15 मार्च को नेशनल वैक्सीन डे मनाया जाता है। 1995 से शुरू हुए इस पोलियो ड्राप अभियान के तहत भारत ने इस बीमारी से निजात पा लिया था। साथ ही साल 2014 में देश को पोलियो से मुक्त घोषित कर दिया गया। बीते कुछ समय से कई बीमारियों की वैक्सीन निकाल दी गई जिसमें कोरोना वैक्सीन सबसे लेटेस्ट है।

कौन-सी थी वो बिमारी जिसकी वजह से बना पहला वैक्सीन?

आज से करीब 222 साल पहले यानी 1798 में दुनिया का सबसे पहला वैक्सीन बनाया गया था। इसे बनाया था महान वैज्ञानिक एडवर्ड जेनर ने। दरअसल उस समय में ‘स्माल पॉक्स’ ने जमकर तबाही मचाई थी। जिसका वैक्सीन बनाना आसान नहीं था। इसमें कई परेशानियां आई थी। जेनर ने गाय में होने वाले चेचक के मवाद से ‘स्माल पॉक्स’ की वैक्सीन बनाई थी। इस मवाद को जेनर ने चेचक के शिकार एक इंसान की बॉडी में डाल दिया। इसके बाद शख्स को बुखार तो हुआ लेकिन चेचक ठीक हो गया। बाद में जब उसी शख्स की बॉडी में एक बार और चेचक का वायरस डाला गया तो उसे इन्फेक्शन नहीं हुआ।

लेकिन जेनर को अपनी इस शोध के कारण काफी विरोध का सामना करना पड़ा था। उनका काफी मजाक भी उड़ाया गया था। लेकिन जेनर ने किसी की परवाह नहीं की। और चुपचाप अपना शोध पूरा किया बाद में जेनर को इस वैक्सीन में सफलता प्राप्त हो गयी और उन्हें इसकी मान्यता मिल गयी।

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