मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राजधानी भोपाल स्थित पंजीयन भवन में अत्याधुनिक साइबर पंजीयन कार्यालय का लोकार्पण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके नेतृत्व में मध्यप्रदेश डिजिटल क्रांति और सुशासन की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और यह पहल प्रदेश को ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में नई पहचान दिलाएगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘संपदा-2 (Sampada 2)’ सॉफ्टवेयर के माध्यम से अब दस्तावेजों का पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस पंजीकरण संभव हो गया है। नागरिकों को अब रजिस्ट्री कराने के लिए उप-पंजीयक कार्यालय जाने की आवश्यकता नहीं होगी। घर बैठे ही लोन दस्तावेज, मुख्तियारनामा, माइनिंग लीज, हलफनामा, पार्टनरशिप डीड सहित अन्य जरूरी दस्तावेजों का पंजीयन किया जा सकेगा।

डॉ. मोहन यादव ने गर्व के साथ कहा कि इस तरह की फेसलेस और डिजिटल पंजीयन व्यवस्था लागू करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है। यह व्यवस्था प्रधानमंत्री के पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन के विजन को धरातल पर उतारने का उदाहरण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि साइबर पंजीयन प्रणाली से मानवीय गलतियों की संभावना न्यूनतम हो जाएगी और रजिस्ट्री प्रक्रिया में होने वाले भ्रष्टाचार और जालसाजी पर प्रभावी रोक लगेगी। अब न तो “अंगूठा लगवाने” की पुरानी प्रक्रिया रहेगी और न ही किसी को “हाथ काले करने” का मौका मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि इस नवाचार को 2025 का राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस स्वर्ण पुरस्कार प्राप्त हुआ है। गुना, हरदा और डिंडोरी में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की गई इस व्यवस्था के तहत अब तक 14 लाख 95 हजार से अधिक दस्तावेजों का सफल पंजीयन किया जा चुका है।

राज्य सरकार ने इस डिजिटल व्यवस्था के विस्तार की योजना भी तैयार कर ली है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के 55 जिलों में साइबर तहसील परियोजना लागू की जा रही है, जिससे नामांतरण, बंटवारा और राजस्व प्रकरणों का निराकरण और अधिक सरल, तेज़ और पारदर्शी हो सकेगा।
डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों और जनता से आह्वान किया कि 31 मार्च तक अधिकतम नागरिक इस तकनीक का लाभ उठाएं। इसके लिए सभी जिलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा विकसित करने पर भी जोर दिया गया, ताकि डिजिटल पंजीयन को जन-आंदोलन का रूप दिया जा सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि साइबर पंजीयन कार्यालय और ‘संपदा-2’ सॉफ्टवेयर का शुभारंभ सुशासन को सुदृढ़ करने और राजस्व प्रक्रियाओं को सरल बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह पहल मध्यप्रदेश को ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों की पंक्ति में खड़ा करती है और नई पीढ़ी को आधुनिक डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने का मजबूत माध्यम बनेगी।