Home विदेश तख्तापलट के बाद म्यांमार में खून की होली, न सेना झुकी और न पब्लिक, 400 से ज्यादा लोगों की गी जान…

तख्तापलट के बाद म्यांमार में खून की होली, न सेना झुकी और न पब्लिक, 400 से ज्यादा लोगों की गी जान…

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नई दिल्ली: म्यांमार में तख्तापलट के बाद से हालात बिगड़ते जा रहे हैं। अब तक यहां सेना की गोलीबारी में 400 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। अकेले शनिवार को म्यांमार में आर्म्ड फोर्सेज डे पर सेना ने परेड निकालकर अपनी ताकत दिखाई। इस बीच लोगों से हुई झड़प में 100 लोगों की मौत हो गई। यह अब तक का एक दिन में सबसे बड़ा आंकड़ा है। इससे पहले 14 मार्च को करीब 90 लोगों की मौत हुई थी। बता दें कि तख्तापलट क बाद सेना सैन्य ताकत के खिलाफ 20 से अधिक शहरों में प्रदर्शन चल रह हैं।

म्यांमार में 1 फरवरी को हुए सैन्य तख्तापलट के बाद मानों पूरा देश खौफ के साये में जी रहा है। सड़कें खून से रंग चुकी हैं। यहां सेना की क्रूरता का सबसे भयानक चेहरा सामने आया है।

हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि सेना प्रदर्शनकारियों को देखते ही गोली मार रही है।

म्यांमार में सेना की यह तानाशाही सारी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गई है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतारेस सेना के अत्याचार की कड़ी निंदा कर चुके हैं।

दुनिया के तमाम देश म्यांमार के घटनाक्रम की निंदा कर रहे हैं। लेकिन सेना पर कोई असर नहीं देखा जा रहा है।

म्यांमार में सैन्य तख्तापलट के बाद प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ती जा रही है। वे देश की शीर्ष नेता आंग सान सू की रिहाई की मांग कर रहे हैं। बता दें कि आंग सान सू बर्मा(अब म्यांमार) के राष्ट्रपिता कहे जाने वाले आंग सान की बेटी हैं। आंग सान की 1947 में हत्या कर दी गई थी।

पुलिस प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने गैस के गोले दाग रही है। गोलियां चला रही है। बावजूद प्रदर्शनकारी डटे हुए हैं।

यह तस्वीर दिखाती है कि म्यांमार में प्रदर्शन कैसा रूप ले चुका है। सेना और प्रदर्शनकारियों के बीच गुरिल्ला युद्ध-सा चल रहा है।

म्यांमार के ज्यादातर शहर हिंसा की चपेट में हैं। लोगों का जीवन संकट में फंसा हुआ है।

इस तरह के हालात बने हुए हैं म्यांमार में। हर तरह आगजनी दिखाई दे रही है।

तख्तापलट के बाद से पूरा देश हिंसा की चपेट में हैं। न पब्लिक झुकने को तैयार है और न सही सेना।

म्यांमार में इस तरह के प्रदर्शन रोज हो रहे हैं। हजारों लोग सेना की गोलीबारी की परवाह न करते हुए सड़कों पर उतर रहे हैं। सेना के दमन के बाद से लोग भी हिंसक हो उठे हैं। वे भी सेना पर हमला कर रहे हैं।

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