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Bhopal: एमपी में 4,000 मेगावाट बिजली आपूर्ति को लेकर होंगे बड़े MoU

ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने जानकारी दी कि ये नए पावर हाउस अनूपपुर जिले में स्थापित किए जाएंगे।

By: Abhinav Tiwari 
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Bhopal: एमपी में 4,000 मेगावाट बिजली आपूर्ति को लेकर होंगे बड़े MoU

मध्यप्रदेश की ऊर्जा क्षमता को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में 27 जनवरी को समत्व भवन, मुख्यमंत्री निवास में 4,000 मेगावाट बिजली आपूर्ति से जुड़े महत्वपूर्ण पावर सप्लाई एग्रीमेंट (PSA) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।

अनूपपुर में स्थापित होंगे नए पावर हाउस

ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने जानकारी दी कि ये नए पावर हाउस अनूपपुर जिले में स्थापित किए जाएंगे। इन परियोजनाओं के माध्यम से मध्यप्रदेश में लगभग 60 हजार करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष निवेश आएगा। साथ ही, 3,000 लोगों को प्रत्यक्ष और लगभग 5,000 लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है।

2030-31 तक बिजली की पूरी मांग होगी पूरी

ऊर्जा मंत्री ने बताया कि वर्ष 2030-31 तक मध्यप्रदेश में बिजली की मांग लगभग 27,000 मेगावाट होने का अनुमान है। 4,000 मेगावाट की अतिरिक्त क्षमता के जुड़ने से प्रदेश में शत-प्रतिशत बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।

प्रतिस्पर्धात्मक बोली से हुआ आवंटन

एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (MPPMCL) द्वारा डीबीएफओओ (Design, Build, Finance, Own and Operate) मॉडल के तहत टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धात्मक बोली प्रक्रिया के माध्यम से 3,200 मेगावाट बिजली खरीद के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई थीं। इसके साथ ग्रीनशू विकल्प के तहत अतिरिक्त 800 मेगावाट बिजली खरीद का भी प्रावधान था।

इन कंपनियों को मिला प्रोजेक्ट

बोली प्रक्रिया के बाद निम्नलिखित कंपनियों को बिजली आपूर्ति की जिम्मेदारी सौंपी गई है-

  • हिंदुस्तान थर्मल प्रोजेक्ट्स लिमिटेड – 800 मेगावाट

  • टोरेंट पावर लिमिटेड – 1,600 मेगावाट

  • अदानी पावर लिमिटेड – 800 मेगावाट

  • ग्रीनशू विकल्प के अंतर्गत अतिरिक्त – 800 मेगावाट

इन सभी परियोजनाओं के लिए चयनित विकासकों द्वारा गठित स्पेशल पर्पस व्हीकल्स (SPV) के साथ बिजली आपूर्ति अनुबंध किए गए हैं।

2030 से शुरू होगी बिजली आपूर्ति

इन विद्युत आपूर्ति अनुबंधों के अंतर्गत वर्ष 2030 से बिजली आपूर्ति प्रारंभ होने की संभावना है। यह पहल न केवल मध्यप्रदेश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार सृजन को भी नई गति देगी।

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