महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी व उद्धव ठाकरे सरकार ने बुधवार को एक बड़ा फैसला लेते हुए राज्यभर में जाति के नाम पर रखे गए रिहायशी इलाकों को बदलने का फरमान जारी किया है। बुधवार को कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगा दी गई है। इस फैसले के बाद सभी हिरायशी कॉलोनियों के नाम जाति के आधार पर रखे जाएंगे।
महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले का सीधा मतलब है कि राज्य में अब किसी भी रिहायशी इलाके का नाम किसी जाति विशेष के नाम पर नहीं होगा बल्कि गांव या इलाके का नाम महापुरुषों के नाम पर रखा जाएगा।
दरअसल, महाराष्ट्र सरकार का मकसद समाज में जाति के नाम पर फैली विभाजन की खाई को खत्म करना है। एकमत से पारित हुए कैबिनेट की तरफ से इस फैसले को मंजूर करने के पीछे महाराष्ट्र सरकार की मंशा है कि किसी इलाके को लोग किसी एक जाति विशेष या समाज विशेष के तौर पर ना पहचानें।
कोई भी व्यक्ति किसी भी इलाके में जाने से पहले नाम सुनकर यह पुनर्भावना ना रखें कि उस इलाके में एक विशेष समाज या जाति के लोग रहते हैं। अगर किसी इलाके का नाम किसी व्यक्ति के सरनेम या जाति के आधार पर है तो उस नाम को बदल दिया जाएगा। नाम बदलकर किसी महापुरुष के नाम पर होगा।
महाराष्ट्र विकास आघाडी के नेताओं के मुताबिक, यह बदलाव महाराष्ट्र विकास आघाडी के मार्गदर्शक नेता और एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार के सुझाव पर किया गया है। शरद पवार ने महाराष्ट्र सरकार में सामाजिक न्याय मंत्री धनंजय मुंडे को यह सुझाव दिया था।
इस सुझाव के पीछे संकल्पना यह थी कि महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में कई जगहों के नाम किसी जाति या उपनाम पर आधारित हैं, जिसकी वजह से कोई व्यक्ति इलाके में पूर्वाग्रह उस जाति या समाज के प्रति पूर्वाग्रह लेकर जाता है और इससे सामाजिक दूरी बढ़ती है।
इसके अलावा राज्य में हुए प्रदर्शनों और आंदोलनों को लेकर भी सरकार ने बड़ा आदेश दिया है। सरकार ने राजनीतिक और सामाजिक धरनों और आंदलनों को लेकर दर्ज हुए अदालती मामले वापस लेने जा रही है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुंबई दौरे से महाराष्ट्र की राजनीति गरमाई हुई है। इसी बीच आज बुधवार को महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में मौजूद रिहाइशी कॉलोनियों के नाम बदलने का फैसला लिया है।
सरकार ने कहा है कि ऐसी सभी कॉलोनियों के नामों को बदला जाएगा, जो जाति के आधार पर रखे गए हैं। इसके अलावा दिसंबर 2019 तक हुए तमाम राजनीतिक और सामाजिक आंदलनों से संबंधित अदालती मामलों को वापस लेने का फैसला लिया है बीते मंगलवार को महाराष्ट्र सरकार ने देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई वाली महाराष्ट्र सरकार में शुरू हुई जलयुक्त शिवर योजना की जांच के आदेश दिए हैं।
इसके लिए एक कमेटी भी गठित की गई है। इस कमेटी की अगुवाई पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव विजय कुमार करेंगे। कुमार से 6 महीनों के भीतर जांच रिपोर्ट दाखिल करने के आदेश दिए हैं। गौरतलब है कि जलयुक्त शिवर योजना एक महत्वकांक्षी जल संरक्षण योजना है। इस योजना को भाजपा सरकार की प्रमुख योजना माना जाता था।
आप को बता दे कि योगी आदित्यनाथ लगातार फिल्मी हस्तियों से बात कर रहे हैं। फिल्म सिटी को लेकर उठे विवाद में सीएम उद्धव ठाकरे, शिवसेना सांसद संजय राउत मनसे प्रमुख राज ठाकरे जैसे महाराष्ट्र राजनीति के कई बड़े नामों ने प्रतिक्रिया दी है।
हालांकि, योगी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान फिल्म सिटी ले जाने के मुद्दे को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा ‘हम यहां से कुछ भी ले जाने के लिए नहीं आए हैं। हम नई फिल्म सिटी बना रहे हैं, लोग इसे लेकर चिंतित क्यों हैं?’ उन्होंने कहा ‘हम लोगों को विश्व स्तरीय संरचना के तौर पर लोगों को कुछ नया देना चाहते हैं।’