भारत की पहली महिली सुप्रीम कोर्ट की जज एम. फातिमा बीवी(1927-2023) का 96 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। उन्होंने अपने कैरियर में लंबे समय तक महिलाओं के विकास के लिए एक रोल मॉडल के रूप में कार्य किया। वहीं सुप्रीम कोर्ट से रिटायरमेंट के बाद उन्होंने अपनी छाप छोड़ते हुए केरल के गवर्नर के तौर पर अपना योगदान दिया था।
फातिमा बीवी ने 1950 में अपने कैरियर की शुरुआत केरल के निचली अदालत से किया। जिसके बाद जल्द ही उनके रैंक में पदोन्नति हुई और वे केरल अधिनस्थ न्यायिक सेवा में अपना सर्विस देना शुरू किया।
केरल के अधिनस्थ न्यायिक सेवा के बाद फातिमा बीवी ने अधीनस्थ जज, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, जिला और न्यायाधीश सत्र और इसके बाद आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण के न्यायिक क्षेत्र में सदस्य के रूप में काम किया। बाद में, वो वर्ष 1983 में हाई कोर्ट की न्यायाधीश और वर्ष 1989 में सुप्रीम कोर्ट की जज बनी।
फातिमा बीवी वह पहली मुस्लिम महिला थी जिन्हें उच्च न्यायालय में पदोन्नति मिली और उन्हें पूरे एशिया राष्ट्र में पहली महिला जज की पदवी पर आसीन होने का गौरव प्राप्त हुआ।
सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत्त होने पर और तमिलनाडु के गवर्नर के तौर पर अपना योगदान देने से पहले राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य के रूप में काम किया था। और राज्यपाल के पद पर रहते हुए वो तमिलनाडु यूनिवर्सिटी के चांसलर के पद पर रहकर शिक्षा क्षेत्र में भी अपना योगदान दिया।
फातिमा बीवी ने 1990 में माननीय पर पर रहते हुए हॉनरेबल.डी.लिट्ट और महिला शिरोमणी अवार्ड से सम्मानित किया गया। इसी के साथ यूएस-इण्डिया बिजनेस काउंसिल(USIBC) में लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया था।