रिपोर्ट: गीतांजली लोहनी
नई दिल्ली: पिछले एक साल से दुनियाभर में कोरोना महामारी ने अर्थव्यवस्था को हिला को रख दिया था। लेकिन इस बीच कई ऐसे मौके भी आए जिनसे इकनॉमी में कई तरह के फायदे भी मिल सकते थे। और बड़ें-बड़ें देश जैसे जापान,दक्षिण कोरिया, ताइवान और चीन ने इन मौकों का फायदा उठाते हुए अपने देश की इकनॉमी को पटरी पर लाने का रिस्क उठाया है।
दरअसल, ये देश अपने वहां की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए सनराइज सेक्टर पर दांव लगा रहे है। दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका में प्रति हजार लोगों पर 900 कार है, और यूरोप में 800 कार प्रति हजार लोगों पर है। अब अगर इसका तुलना हम अपने देश भारत से करें तो यहां प्रति हजार लोगों पर सिर्फ और सिर्फ 20 कार ही उपलब्ध है। तो ये देश के लिए एक खास अवसर है जहां प्रति व्यक्ति वाहन की संख्या बढ़ाकर हम काफी ग्रोथ हासिल कर सकते हैं।
इसको ऐसे समझिए-
दरअसल, इस इकनॉमी पर ध्यान देने के लिए भारत को इलेक्ट्रिक व्हीकल पर ध्यान देने की सबसे पहले जरूरत है।इससे क्या होगा कि सस्ता, आसान और स्वच्छ मोबिलिटी इकोसिस्टम विकसित करने में मदद करेगा। तो वहीं भारत में वाहनों की कुल आबादी का 70% तो टू व्हीलर ही है, तो अगर टू व्हीलर और थ्री व्हीलर को इलेक्ट्रिक व्हीकल इको सिस्टम में शामिल किया जाए तो भारत के सामने ये अच्छा अवसर हो जाएगा जब वह सबसे कम कीमत में इलेक्ट्रिकल व्हीकल बनाने वाला ग्लोबल मैन्युफैक्चरर बन जाएगा।
अब जैसे दुनिया की बड़ी 10 कंपनियों में से आठ टेक और डिजिटल कंपनियां है। तो अगर दुनिया भर के जॉब मार्केट की तरफ ध्यान दें तो सबसे तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्पेशलिस्ट और डाटा साइंटिस्ट की मांग बढ़ रही है। एक रिसर्च रिपोर्ट में यह पता लगा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से भारत के आर्थिक ग्रोथ को साल 2035 तक 1.3% प्वाइंट तेज किया जा सकता है।
और भारत में तो दुनियाभर से सबसे सस्ता डाटा उपलब्ध है, और देश में इंटरनेट यूज करने वालों की आबादी भी 65 करोड़ है। वहीं हर 3 सेकेंड बाद एक नया बंदा इंटरनेट इस्तेमाल करता है। यानि अब भारत को जरुरत है डाटा इंटेलिजेंट कंट्री बनने की ना कि डाटा रिच कंट्री।
अब अगर बात आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के रिसर्च की करें तो इसके माध्यम से एक तरफ जहां टीबी, कैंसर जैसी बीमारियों का समाधान खोजा जा सकता है, वहीं कृषि उत्पादकता में भी वृद्धि लाई जा सकती है।
वहीं टेलीकॉम नेटवर्क के बारे में बताएं तो 5th जेनरेशन का मोबाइल नेटवर्क तकनीक भारत में लोगों के संपर्क साधने, डिवाइस और वस्तुओं को कंट्रोल करने और तेज एवं बेहतर कम्युनिकेशन के हिसाब से क्रांति ला सकता है। यानि भारत में 5G यूजर एक्सपीरियंस को भी सही तरीके से इस्तेमाल करने की भी जरूरत है।
वहीं भारत में सामुदायिक स्वास्थ्य सेवा बढ़ाकर भी देश की GDP ग्रोथ बढ़ायी जा सकती है। जेनेटिक टेस्टिंग और एनालिसिस की मदद से ये मुमकिन होगा। बस इसमें देश को जेनेटिक टेस्टिंग, एनालिसिस, काउंसलिंग और थेरेपी में निजी निवेश को बढ़ावा देना होगा।