सीहोर जिले के भेरूंदा में बस किराया कम कराने की मांग को लेकर छात्राओं ने प्रदर्शन किया। तेज बारिश के बीच छात्राएं भेरूंदा बस स्टॉप पर धरने पर बैठ गईं। छात्राओं का कहना है कि बढ़ा हुआ किराया उनके परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि बस संचालक किराया बढ़ा सकते हैं तो विद्यार्थियों के लिए किराया कम करने पर भी विचार किया जाना चाहिए।
छात्राओं के धरने की जानकारी मिलने पर पुलिस और तहसीलदार मौके पर पहुंचे। तहसीलदार ने छात्राओं से चर्चा करते हुए बताया कि स्थानीय प्रशासन के स्तर पर बस किराया निर्धारित करने का अधिकार नहीं है और इस संबंध में सरकार के स्तर पर निर्णय लिया जा सकता है। हालांकि, छात्राएं अपनी मांग पर कायम रहीं और बारिश के बावजूद धरना जारी रखा।
धरने की जानकारी मिलने के बाद बुधनी विधायक रमाकांत भार्गव भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने छात्राओं से बातचीत की और उन्हें 4 सितंबर को भोपाल आने के लिए कहा। विधायक ने वहां उनकी समस्या पर चर्चा करने का आश्वासन दिया। इसके बाद छात्राओं ने उम्मीद जताई कि सरकार उनके बस किराए से जुड़े मुद्दे पर कोई ठोस निर्णय लेगी।
भेरूंदा में इसी दिन विशाल कांवड़ यात्रा का आयोजन भी होना था। यात्रा में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय चौहान के शामिल होने की चर्चा थी। यात्रा शुरू होने से करीब चार घंटे पहले छात्राओं ने बस किराया कम कराने की मांग को लेकर धरना शुरू किया।
बस किराए के मुद्दे के साथ स्थानीय लोगों ने प्रशासन की प्राथमिकताओं को लेकर भी सवाल उठाए। लोगों का आरोप है कि नगर की एक पुलिया के नीचे कई दिनों से पानी जमा था और शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। स्थानीय लोगों के मुताबिक, वीआईपी कार्यक्रम की जानकारी सामने आने के बाद रातों-रात मशीनें लगाकर रास्ते पर गिट्टी डालने का काम शुरू कर दिया गया। इसे लेकर लोगों ने सवाल उठाया कि आम लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन को वीआईपी कार्यक्रम का इंतजार क्यों करना पड़ा।
छात्राओं का कहना है कि बारिश के मौसम में स्कूल-कॉलेज आने-जाने के लिए उन्हें बसों पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में बढ़ा किराया उनके लिए बड़ी समस्या बन रहा है। अब छात्राओं की नजर 4 सितंबर को भोपाल में प्रस्तावित बातचीत पर है। देखना होगा कि सरकार की ओर से उन्हें केवल आश्वासन मिलता है या बस किराए को कम करने के संबंध में कोई ठोस निर्णय भी लिया जाता है।