दूषित पेयजल से हुई मौतों के बाद इंदौर नगर निगम में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। क्षितिज सिंघल ने इंदौर नगर निगम के नए आयुक्त के रूप में पदभार संभाल लिया है। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कड़ा एक्शन लेते हुए तत्कालीन आयुक्त दिलीप यादव को पद से हटाकर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में उप सचिव के पद पर पदस्थ करने के निर्देश दिए थे।

2 जनवरी (शुक्रवार) को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से हुई मौतों के मामले में सख्ती दिखाई थी। इस दौरान नगर निगम के अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया और पीएचई के प्रभारी अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव को पहले हटाने और बाद में निलंबित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों पर जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्पष्ट कहा था कि जनस्वास्थ्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और नागरिक सुविधाओं में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने प्रदेश के सभी नगर निगमों में साफ पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। इस संबंध में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा SOP भी जारी की गई है।
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से फैले डायरिया ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। दिसंबर 2025 के अंत में शुरू हुए इस प्रकोप में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 5 महीने का एक बच्चा भी शामिल है।
वर्तमान में 200 से अधिक मरीज शहर के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। आठ वर्षों से देश का सबसे स्वच्छ शहर माने जाने वाले इंदौर में इस घटना ने जल आपूर्ति व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस गंभीर घटना पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे मानवाधिकार से जुड़ा गंभीर मामला बताया है। आयोग ने कहा कि यह घटना शहरी जल संरचना में गहरी खामियों का संकेत है।
वैश्विक शोधों का हवाला देते हुए बताया गया कि सीवेज लीकेज और खराब सैनिटेशन के कारण दुनिया भर में करोड़ों लोग असुरक्षित पानी पर निर्भर हैं, और इंदौर की यह घटना भारत में शहरी जल प्रबंधन की बड़ी चुनौती को उजागर करती है।
भागीरथपुरा और आसपास के क्षेत्रों में अभी भी डर और चिंता का माहौल है। कई परिवारों के सभी सदस्य बीमार हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पानी में बदबू और गंदगी की शिकायतें पहले से की जा रही थीं, लेकिन समय रहते कार्रवाई नहीं हुई। फिलहाल शहर के अस्पतालों में मरीजों का इलाज लगातार जारी है और प्रशासन की ओर से निगरानी बढ़ा दी गई है।
IAS क्षितिज सिंघल के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इंदौर की पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त करना, दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित करना और नागरिकों का भरोसा दोबारा कायम करना है। सरकार ने साफ संकेत दे दिए हैं कि जवाबदेही और पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
