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कोविड पॉजिटिव के कारण जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है पति, पत्नी ने खटखटाया कोर्ट का दरवाजा, आखिरी निशानी मांगी स्पर्म

By Amit ranjan 
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नई दिल्ली : कोरोना काल के दौरान कई ऐसे भावुक करने वाली खबरें सामने आई हैं, जिसने एक तरफ जहां लोगों को इमोशनल किया। वहीं कई लोगों को पूरी तरह से तोड़ दिया, जिससे वे अब भी उबरने की कोशिश कर रहे है। ऐसा ही एक मामला गुजरात में सामने आया है। यहां अस्पताल में भर्ती कोविड पॉजिटिव पति जिंदगी और मौत को बीच झूल रहा है। डॉक्टरों ने पति के बचने की उम्मीद न के बराबर बताई है। ऐसे में अगर पति को कुछ हो जाए तो पत्नी उसकी निशानी अपनी कोख में चाहती है। इसलिए पत्नी से हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर पति का स्पर्म मांगा है।

गुजरात के वडोदरा में महिला और उसके सास-ससुर की तरफ से इमरजेंसी सुनवाई के लिए एक याचिका दायर की गई। याचिका में महिला ने कहा कि उसके 29 साल के पति अस्पताल में भर्ती हैं। डॉक्टरों ने कहा है कि उनके बचने की कोई उम्मीद नहीं है।

हॉस्पिटल को स्पर्म प्रिजर्व करने का आदेश

महिला ने कहा कि वह अपने पति के बच्चे की मां बनना चाहती है इसलिए कोर्ट उसके पति का स्पर्म प्रिजर्व करने का आदेश दे। वह इस स्पर्म के जरिए आईवीएफ, असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नॉलजी से मां बन सके। कोर्ट ने इस मामले को असाधारण मानते हुए वडोदरा के हॉस्पिटल को महिला के पति का स्पर्म प्रिजर्व करने का आदेश सुनाया।

अस्पताल प्रशासन ने पहले कर दिया था इनकार

महिला के वकील निलय पटेल ने बताया कि महिला ने पहले हॉस्पिटल प्रशासन से अनुरोध किया था कि उसके पति का स्पर्म प्रिजर्व कर लें लेकिन हॉस्पिटल प्रशासन ने इससे इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि बिना मरीज की सहमति के वह ऐसा नहीं कर सकते हैं। मरीज बेसुध, उसका मल्टि ऑर्गन फेलियर हो चुका है और वह वेंटिलेटर सपॉर्ट पर है, ऐसे में वह उसका स्पर्म नहीं ले सकते हैं।

10 मई से अस्पताल में है पति

वकील ने अदालत से मामले की तत्काल सुनवाई करने का अनुरोध किया और न्यायमूर्ति आशुतोष शास्त्री सहमत हो गए। कोर्ट को बताया गया कि मरीज 10 मई से भर्ती है और डॉक्टरों ने परिवार को बता दिया है कि उसे अब बचाया नहीं जा सकता है। अदालत ने कहा कि अगर मामले को तत्काल नहीं निपटाया गया तो यह एक अपरिवर्तनीय स्थिति पैदा करेगा।

23 जुलाई को फिर रखी गई सुनवाई की तारीख

अदालत ने कहा, ‘एक असाधारण महत्वपूर्ण स्थिति को देखते हुए अभी के लिए अंतरिम राहत दी जाती है और यह राहत याचिका की सुनवाई पूरी होने के बाद आने वाले फैसले के अधीन होगी।’ कोर्ट ने फिलहाल महिला के पति का स्पर्म प्रिजर्व करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने इस मामले की आगे सुनवाई के लिए 23 जुलाई की तारीख तय की है।

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