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चार दशकों से कैसे मध्यपूर्व में ताकतवर थे कासिम सुलेमानी

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पिछले दिनों इराक में ईरान के मेजर जनरल कासिम सुलेमानी के मारे जाने के बाद दुनियाभर में तनाव का माहौल है। लंबे समय से एक दूसरे के प्रदिद्वंदी रहे ईरान और अमेरिका के बीच इस घटना के बाद तनाव चरम पर पहुंच चुका है। क्योंकि ईरान में सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्ला खामेनेई के बाद कासिम को दूसरे नंबर का ताकतवर नेता माना जाता था। इतना ही नहीं कासिम सुलेमानी ईरान की सेना इस्लामिक रिव़ॉलूशनरी गार्ड की विदेशी विंग कद्स फोर्स के जनरल थे। इस यूनिट ने 1998 में अपने काम की शुरूआत की थी। इनका दखल सीरिया, लेबनान औऱ इराक से लेकर यमन तक था। इन चारों देशों में कासिम सुलेमानी का दबदबा था। 

ईरानी सेना में ताकतवर थे सुलेमानी

पूर्वी ईरान में 1957 में एक गरीब परिवार में सुलेमानी का जन्म हुआ था औऱ वे काफी कम उम्र में ही सेना में भर्ती हो गए थे। 1980 के ईरान- इराक युद्ध में सीमा सुरक्षा को लेकर वह काफी चर्चित रहे थे। इस युद्ध में अमेरिका ने इराक का साथ दिया था। 

मध्यपूर्व में शियाओं के बीच चर्चित थे सुलेमानी

ईरान के बाहर मध्यपूर्व के देशों में अभियान चलाने में सुलेमानी ने अहम भूमिका निभाई थी। इसलिए उन्हें अमेरिका के एक पूर्व सीआईए एनालिस्ट ने मध्यपूर्व के शियाओं का जेम्स बॉन्ड और लेडी गागा जैसे पॉप्यूलर बताया था। इतना ही नहीं साल 2019 में सुलेमानी को ईरान का सर्वोच्च सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ जुल्फिकार’ दिया गया था। इससे पहले भी अमेरिका की तरफ से प्रतिबंधित होने का सामना करने वाले सुलेमानी की मौत की खबरें आई थी लेकिन वो गलत साबित हुई। साल 2006 में ईरान में एक प्लेन क्रैश और 2012 में दमिश्क में हुई भारी बमबारी में उनकी मौत की खबरे आई थी। इतना ही नहीं अलेप्पो में 2015 में हुए अटैक में भी सुलेमानी की मौत की अफवाह फैली थी लेकिन इस बार ऐसा नहीं था। 

जिंदा शहीद के नाम से चर्चित थे सुलेमानी

कासिम सुलेमानी हमेशा दुश्मनों के टारगेट पर हुआ करते थे जिसके कारण ईरान के धार्मिक नेता अयातुल्लाह खामेनेई सुलेमानी को ‘जिंदा शहीद’ कहते थे।  लेकिन कासिम सुलेमानी की मौत के बाद खामेनेई ने कहा कि उनका मिशन कभी खत्म नहीं होगा।

साल 2018 में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनाल्ड ट्रंप के एक ट्विट के जवाब में कासिम ने लिखा था, हम आपके पास हैं इतना, जितना आप सोच भी नहीं सकते हैं। आओ, हम तैयार हैं यदी आप जंग शुरू करेंगे तो हम खत्म करेंगे। आप जानते हैं कि यह जंग आपकी ताकत को पूरी तरह खत्म कर देगी।

दरअसल 1980 में अमेरिका ने ईरान औऱ इराक के बीच हुए जंग में इराक का साथ दिया था जिसके बाद से दोनों देशों के बीच संबंध कभी भी सहज नहीं रहे। इतना ही नहीं 1984 में अमेरिका ने ईरान को आतंकवाद बढ़ाने वाला देश करार दिया था और कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए थे। इसके बाद से आजतक ईरान और अमेरिका के संबंध अच्छे नहीं रहे।

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