जबलपुरः मध्य प्रदेश के बहुचर्चित नर्सिंग घोटाले में हाईकोर्ट ने बड़ा कदम उठाते हुए सत्र 2022-23 के जीएनएम प्रथम वर्ष के करीब 30 हजार छात्रों के परीक्षा परिणाम जारी करने पर फिलहाल रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच के समक्ष हुई सुनवाई में एमपी नर्सिंग काउंसिल ने परिणाम जारी करने की अनुमति मांगी थी।
इस पर याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि प्रदेश में सैकड़ों नर्सिंग कॉलेज बिना बुनियादी सुविधाओं जैसे भवन, लैब, लाइब्रेरी और फैकल्टी के ही संचालित हो रहे हैं और कई संस्थान जांच में अपात्र पाए जाने के बावजूद उनके छात्रों को मान्यता प्राप्त कॉलेजों में स्थानांतरित नहीं किया गया।
HC ने मांगी सभी कॉलेजों में अध्ययनरत छात्रों की विस्तृत जानकारी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने काउंसिल से कड़े सवाल करते हुए पूछा कि जिन छात्रों का रिजल्ट जारी किया जाना है, वे किन कॉलेजों में पढ़े हैं और क्या उन संस्थानों के पास आवश्यक संसाधन मौजूद थे। कोर्ट ने सभी 400 कॉलेजों में अध्ययनरत छात्रों की विस्तृत जानकारी पेश करने के निर्देश देते हुए स्पष्ट किया कि जब तक पूरी जानकारी और रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किया जाता, तब तक किसी भी प्रकार का परीक्षा परिणाम जारी नहीं किया जा सकता।
छात्रों के पात्र संस्थानों में स्थानांतरित करने के आदेश
साथ ही कोर्ट ने कहा कि मापदंडों को पूरा नहीं करने वाले कॉलेजों के छात्रों को पहले पात्र संस्थानों में स्थानांतरित किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 24 अप्रैल को निर्धारित की गई है।
जबलपुर से संवाददाता दिनेश चौधरी की रिपोर्ट