बुरहानपुरः जिले के धुलकोट क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर बदहाली सामने आई है। तहसील का दर्जा मिलने के बावजूद यहां का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खुद “मरीज” बना हुआ है। न यहां एमबीबीएस डॉक्टर है और न ही एम्बुलेंस की सुविधा। जिसका खामियाजा करीब 25 गांवों के 50 हजार से अधिक ग्रामीण भुगत रहे हैं।
धुलकोट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर पिपराना, भगवानिया, बोरीबुजुर्ग, चिखल्या, सराय, उतांबी, दवाटिया, अंबा, गंभीरपुरा, सुक्ताखुर्द, धांड और हरदा सहित आसपास के गांवों के लोग इलाज के लिए निर्भर हैं। लेकिन डॉक्टर की अनुपस्थिति के कारण मरीजों को तत्काल 35 किलोमीटर दूर बुरहानपुर जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
सबसे चिंताजनक स्थिति आपातकालीन सेवाओं की है। एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को नेपानगर या बुरहानपुर से वाहन आने का इंतजार करना पड़ता है, जिससे कई बार उनकी जान पर बन आती है।
वहीं अंबा उप स्वास्थ्य केंद्र की हालत भी बेहद खराब है। यहां पिछले 15 से 18 महीनों से नर्स की नियुक्ति नहीं हुई है, जिसके चलते गर्भवती महिलाओं और बच्चों को टीकाकरण जैसी जरूरी सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों, कांग्रेस कार्यकर्ताओं, वरिष्ठ नागरिकों और युवाओं ने एकजुट होकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनका कहना है कि तहसील होने के बावजूद धुलकोट में स्वास्थ्य सुविधाएं पूरी तरह लचर हैं, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि जल्द से जल्द प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर एमबीबीएस डॉक्टर की नियुक्ति, एम्बुलेंस की व्यवस्था और उप स्वास्थ्य केंद्रों पर स्टाफ की बहाली सुनिश्चित की जाए, ताकि हजारों लोगों को राहत मिल सके। इस मामले में तहसीलदार प्रवीण ओरिया ने कहा है कि ज्ञापन को उच्च अधिकारियों तक भेज दिया गया है और जल्द कार्रवाई की उम्मीद है।