Home Breaking News इटावा में कपङा छपाई कारखाने पर की गई छापा मारी में पकङी लाखों रुपये जीएसटी की चोरी

इटावा में कपङा छपाई कारखाने पर की गई छापा मारी में पकङी लाखों रुपये जीएसटी की चोरी

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शासन के निर्देशानुसार राज्य जीएसटी विभाग इटावा संभाग के ज्वाइंट कमिश्नर हरीलाल प्रजापति द्वारा अपनी टीम के डिप्टी कमिश्नर रमाशंकर सिंह, असिस्टेंट कमिश्नर चरन सिंह, वाणिज्य कर अधिकारी श्रीमती साधना मिश्र अरविंद यादव, फतेहगढ के सचल दल प्रभारी असिस्टेंट कमिश्नर अतुल कुमार व वाणिज्य कर अधिकारी गणेश यादव , सोनिया शर्मा, अभिषेक मिश्र एवं रामानंद अवस्थी आदि टीम के साथ फर्रुखाबाद के अंगूरीबाग स्थित मैसर्स- एस एस फैशन इण्डिया कपङा छपाई कारखाने पर अचानक छापा मारी कर जांच-पड़ताल की गई ।

जीएसटी विभाग इटावा संभाग की एस आई बी टीम द्वारा उक्त प्रतिष्ठान पर अचानक की गई छापामारी से स्कार्फ, दुपट्टा, शाल आदि की डाइंग, कलरिंग एवं प्रिन्टिंग का कारोबार करने वाले व्यापारियों में हङकम्प मच गया ।

छापामारी की भनक लगते ही उक्त कारोबार करने वाले अधिकांश कारोबारी अपने प्रतिष्ठान बन्द कर गायब हो गये । छापामारी के दौरान मैसर्स-एस एस फैशन इण्डिया प्रतिष्ठान मौजूद प्रतिष्ठान मालिक जयेश साध व राजकुमार साध से ज्वाइंट कमिश्नर हरीलाल प्रजापति द्वारा पूंछतांछ करने पर उन्होंने बताया कि हमारे उक्त प्रतिष्ठान पर स्कार्फ, दुपट्टा एवं शाल आदि की डाइंग,कलरिंग व प्रिंटिंग आदि कर पैकिंग कर बिक्री की जाती है ।

वहीं छापा मारी के बाबत एच एन एन/ आर एन आई संवाददाता सतीश गुप्ता द्वारा जानकारी करने पर ज्वाइंट कमिश्नर हरीलाल प्रजापति ने बताया कि उक्त फर्म द्वारा विगत 4 वर्षों से कोई कर जमा न करने, अधिक आईटीसी क्लेम करने, एवं निर्माण की प्रक्रिया में कोई मूल्य संवर्धन प्रदर्शित न करने के आधार पर व्यापारी के डाटा का विश्लेषण करते हुए आज यह छापामारी कर जांच-पड़ताल की गई है ।

जांच-पड़ताल के दौरान मौके पर 60 लाख 74 हजार रुपये का माल पाया गया। जिसका सत्यापन व्यापारी द्वारा अपने लेखा पुस्तकों एवं स्टाक रजिस्टर से नहीं कराये जा सकने पर उक्त माल को सीज करते हुए 12 लाख 64 हजार रुपये कर एवं अर्थदंड जमा करने व्यापारी को निर्देश दिये ।

उक्त के साथ तीन स्टीमेट बुक एवं एक कैशमेमी अधिग्रहित किया गया ।जिसकी विवेचना की जायेगी । ज्वाइंट कमिश्नर हरीलाल प्रजापति ने बताया कि सम्पूर्ण प्रक्रिया में प्रथम दृष्ट्या पाया गया कि व्यापारी द्वारा बिक्री को छिपाया जा रहा है ।जिससे कोई कर जमा नहीं हो पा रहा है ।जांच पूर्ण होने एवं विवेचना होने के उपरांत भारी कर अपवंचन की संभावना है।

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