77वें गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर लोकभवन, भोपाल में सोमवार को गरिमामय स्वागत समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आगंतुकों से भेंट कर उन्हें गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएँ दीं। समारोह में पंचायत, ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री प्रहलाद पटेल, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर, महापौर मालती राय तथा विधायक एवं प्रदेश अध्यक्ष हेमन्त खंडेलवाल सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। लोकभवन में आयोजित इस समारोह के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्यपाल मंगुभाई पटेल को पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया।
समारोह को विशेष गरिमा प्रदान की मालिनी अवस्थी की भावपूर्ण सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने। उनके लोकगीतों और धुनों ने स्वतंत्रता संग्राम की स्मृतियों को जीवंत कर दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ सूरीनाम के कवि रघुवीर प्रसाद की कालजयी रचना “बटोहिया” से हुआ, जिसने भारत-भूमि के गौरव का स्मरण कराया।
इसके बाद कजरी शैली में प्रतिबंधित क्रांतिकारी रचना “कितने वीर झूले झुलाए, बेईमान झूलनवा” प्रस्तुत की गई, जिसमें अंग्रेजी शासन के विरुद्ध जनाक्रोश की झलक दिखाई दी। मथुरा की रसिया लोकशैली में “जंग में पकड़ लूंगी तलवार” गीत के माध्यम से भारतीय नारी के शौर्य और स्वाभिमान को स्वर मिला।
अवध की आल्हा परंपरा में मंगल पांडे की वीरता, काशी की विद्याधरनी बाई की रचना “हिंद का बगीचा गुलज़ार न रह जाए” और गोरखपुर के लोकगीत “पैसा का लोभी फिरंगिया” ने औपनिवेशिक शोषण के विरुद्ध लोकस्वर को मुखर किया। भारत छोड़ो आंदोलन से प्रेरित गीत “मंत्र यही है, तंत्र यही है, मंत्र वंदेमातरम्” ने पूरे वातावरण को राष्ट्रभाव से ओतप्रोत कर दिया। समापन बहादुर शाह ज़फर की पंक्तियों “लूट गई बगिया सारी, जल गई फुलवारी” की फाग शैली में प्रस्तुति से हुआ।
इस अवसर पर मुख्य सचिव अनुराग जैन, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना, पद्म अलंकरण से सम्मानित विभूतियाँ, न्यायाधीश, आयोगों व निगम-मंडलों के अध्यक्ष, विश्वविद्यालयों के कुलगुरु, विधायक, पंचायत प्रतिनिधि, विभिन्न धर्मों के धर्मगुरु, सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों के पदाधिकारी, निजी विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति, सेना, पुलिस, प्रशासन व न्यायिक सेवा के अधिकारी, चिकित्सक, पत्रकार, खेल प्रतिभाएँ, मेधावी छात्र-छात्राएँ तथा गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। लोकभवन का यह स्वागत समारोह गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक चेतना और लोकतांत्रिक मूल्यों का सजीव प्रतीक बनकर उभरा।