Uttar Pradesh News: गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी चुनाव का परिणाम घोषित हो चुका है। भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने निर्दलीय प्रत्याशी राजीव यादव को 307 मतों से शिकस्त देकर जीत दर्ज की है। लेकिन चुनाव परिणाम आने के बाद भी इस चुनाव को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। निर्दलीय प्रत्याशी रहे राजीव यादव ने मतगणना में बड़े पैमाने पर धांधली और अपने वोटों की चोरी किए जाने का गंभीर आरोप लगाया है। इसी सिलसिले में आज राजीव यादव गोरखपुर प्रेस क्लब पहुंचे, जहां उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मतगणना के दौरान हुई कथित अनियमितताओं का खुलासा किया। साथ ही निर्वाचन आयोग से चुनाव निरस्त करने और मतपत्रों की फॉरेंसिक जांच कराने की मांग की है। राजीव यादव का कहना है कि अगर उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वह न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। देखिए हमारी खास बातचीत।
गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे राजीव यादव ने बीजेपी प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी को कड़ी टक्कर दी थी। चुनाव के शुरुआती रुझानों से लेकर अंतिम चरण तक मुकाबला बेहद दिलचस्प बना रहा। हालांकि अंतिम परिणाम में ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने 307 मतों से जीत दर्ज की। लेकिन राजीव यादव इस परिणाम को स्वीकार करने के बजाय मतगणना की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। गोरखपुर प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राजीव यादव ने दावा किया कि मतगणना के शुरुआती तीन राउंड तक लगभग 42 हजार मतों की गिनती हो चुकी थी, जिसमें वह 376 मतों से आगे चल रहे थे। लेकिन चौथे राउंड में महज 1612 मतों की गिनती के दौरान पूरा चुनावी परिणाम पलट गया और उन्हें 464 मतों से पीछे कर दिया गया।
राजीव यादव का आरोप है कि अंतिम और चौथे राउंड में मतों की गिनती के दौरान उनके साथ सुनियोजित तरीके से गड़बड़ी की गई। उन्होंने दावा किया कि अंतिम 1612 मतों में से 970 मत बीजेपी प्रत्याशी के ध्रुव कुमार त्रिपाठी के पक्ष में चले गए, जबकि उनके हिस्से में महज 153 मत आए। राजीव यादव ने मतपत्रों पर लिखी गई वरीयता को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि उनके नाम के आगे लिखे गए अंक एक को चार में बदल दिया गया, जबकि बीजेपी प्रत्याशी के नाम के आगे खाली स्थान पर एक अंक दर्ज कर दिया गया। उनका कहना है कि इसी तरीके से मतों की वरीयता में बदलाव कर उनके पक्ष में पड़े मतों को प्रभावित किया गया। उन्होंने कहा कि शिक्षक एमएलसी चुनाव में मतपत्रों की गिनती बूथवार नहीं होती, बल्कि सभी मतपत्रों को मिलाकर उनकी गणना की जाती है। ऐसे में शुरुआती 42 हजार मतों में जो रुझान सामने आया, अंतिम मतपत्रों में भी उसी तरह का रुझान दिखाई देना चाहिए था। लेकिन आखिरी चरण में अचानक इतनी बड़ी संख्या में मतों का दूसरी वरीयता में बदल जाना संदेह पैदा करता है। राजीव यादव ने यह भी कहा कि अगर आप इतने ईमानदार हैं और आपको लग रहा है कि मैं गलत हूं, तो हमारे मतपत्रों की चौथी प्राथमिकता की फॉरेंसिक जांच करा लीजिए। यह जांच होनी चाहिए कि मतपत्रों पर लिखावट अलग-अलग है या नहीं, और क्या उन पर अलग-अलग समय में अंक दर्ज किए गए हैं। अगर मैं गलत साबित होता हूं तो मुझे जो सजा देनी हो, दीजिए, मैं तैयार हूं।
मतगणना केंद्र पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने और प्रत्याशियों के एजेंटों की मौजूदगी को लेकर जब सवाल पूछा गया कि आखिर धांधली कैसे हुई, तो राजीव यादव ने प्रशासनिक व्यवस्था पर ही सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने दावा किया कि मतगणना स्थल पर सीसीटीवी कैमरे तो लगे थे, लेकिन बाहर कोई ऐसी स्क्रीन नहीं लगाई गई थी, जिस पर एजेंट और अन्य लोग पूरी मतगणना प्रक्रिया को लाइव देख सकें। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मतपेटियों को रखे जाने वाले स्थान पर शुरुआती दौर में केवल एजेंटों को जाने दिया गया, लेकिन उसके बाद मतपेटियों के आने-जाने के दौरान किसी को वहां जाने की अनुमति नहीं दी गई। गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के निर्दलीय एमएलसी प्रत्याशी रहे राजीव यादव के मुताबिक, जब उन्होंने मतों में कथित फेरबदल की आशंका जताते हुए जिलाधिकारी से संबंधित समय का सीसीटीवी फुटेज मांगा तो जिलाधिकारी ने फुटेज देने में असमर्थता जताई। राजीव यादव ने इस पूरी घटना को गंभीर साजिश बताते हुए आरोप लगाया कि पूरी मशीनरी मिलकर एक सम्मानित शिक्षक और शिक्षक राजनीति की आवाज को खत्म करने का प्रयास कर रही है। आगे राजीव यादव ने कहा कि जब मैंने कहा कि इस समय मेरे वोटों में फेरबदल और चोरी की गई है, तो डीएम साहब से हमने उस समय का सीसीटीवी फुटेज मांगा। लेकिन उन्होंने कहा कि मैं इस समय का फुटेज नहीं दे सकता। इससे पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं।
राजीव यादव ने बताया कि उन्होंने इस पूरे मामले को लेकर महामहिम राज्यपाल, भारत निर्वाचन आयोग और उत्तर प्रदेश निर्वाचन आयोग को अपना पत्र सौंप दिया है। पत्र के माध्यम से उन्होंने अपने साथ हुए कथित अन्याय की शिकायत करते हुए मतपत्रों की चौथी प्राथमिकता की फॉरेंसिक जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने निर्वाचन आयोग से पूरे चुनाव को निरस्त करने की मांग की है। राजीव यादव का कहना है कि अगर चुनाव निरस्त करना संभव नहीं है तो दूसरे स्थान पर रहे प्रत्याशी को विजेता घोषित किया जाना चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि यदि निर्वाचन आयोग और संबंधित अधिकारी उनकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं करते हैं तो वह एक-दो दिन के भीतर न्यायालय पहुंचकर रिट याचिका दाखिल करेंगे।
चुनावी विवाद के बीच राजीव यादव ने उन लगभग 15 हजार शिक्षकों का भी जिक्र किया, जिन्होंने उनके समर्थन में मतदान किया। उनसे जब पूछा गया कि चुनाव के बाद शिक्षकों की समस्याओं और उनके अधिकारों की लड़ाई वह किस तरह लड़ेंगे, तो उन्होंने कहा कि वह पहले भी शिक्षकों के मुद्दों को लेकर संघर्ष करते रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे। राजीव यादव के मुताबिक, शिक्षकों को डीआईओएस, संयुक्त शिक्षा निदेशक यानी जेडी और विद्यालय प्रबंधन से जुड़ी तमाम समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इन समस्याओं को लेकर वह पहले भी सड़क पर उतरकर संघर्ष करते रहे हैं और आगे भी शिक्षकों के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उनकी कोशिश थी कि शिक्षक हितों की लड़ाई सदन के भीतर पहुंचकर लड़ी जाए, ताकि नीतिगत मामलों को शासन और सरकार के स्तर पर उठाकर उनका समाधान कराया जा सके। गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के निर्दलीय एमएलसी प्रत्याशी रहे राजीव यादव ने यह भी कहा कि शिक्षकों की लड़ाई मैं पहले भी लड़ता रहा हूं। डीआईओएस से परेशानी हो, जेडी से परेशानी हो या प्रबंध तंत्र से, इन मुद्दों पर हम लगातार संघर्ष करते रहे हैं। सदन में जाने का उद्देश्य यही था कि नीतिगत मामलों को सरकार और शासन के स्तर पर उठाकर उनका समाधान कराया जा सके। आगे भी शिक्षकों को जहां कोई दिक्कत आएगी, हम मजबूती से उनके साथ खड़े रहेंगे।
आरएनआई न्यूज़ चैनल से बातचीत के दौरान जब राजीव यादव से सवाल किया गया कि चुनाव में कड़ी टक्कर देने के बाद अगर भविष्य में समाजवादी पार्टी, बीजेपी या कांग्रेस जैसी कोई राजनीतिक पार्टी उन्हें अपने साथ आने और कोई पद देने का प्रस्ताव देती है तो क्या वह स्वीकार करेंगे? इस पर राजीव यादव ने दो टूक जवाब देते हुए कहा कि शिक्षक राजनीति किसी राजनीतिक दल के बैनर तले नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि शिक्षक राजनीति पूरी तरह संगठन की राजनीति है और यह शिक्षक संगठनों के बैनर तले ही होनी चाहिए। उन्होंने उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के पुराने संघर्षों और उसके संस्थापक नेताओं का जिक्र करते हुए आरएन त्रिपाठी, पंचानन राय, प्रकाश शर्मा और मंधाता सिंह जैसे नेताओं को याद किया। राजीव यादव ने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने अपने खून-पसीने से संगठन को खड़ा किया और शिक्षकों को सम्मानजनक वेतन तथा सुविधाएं दिलाने के लिए संघर्ष किया, आज उसी संगठन को कमजोर कर दिया गया है।उन्होंने कहा कि वह शिक्षक राजनीति की स्वतंत्र पहचान और संगठन की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और किसी राजनीतिक दल के सामने घुटने नहीं टेकेंगे। मर जाऊंगा लेकिन शिक्षक राजनीति को किसी दल के दलदल में नहीं धकेल सकता। शिक्षक राजनीति संगठन की राजनीति है और शिक्षक राजनीति शिक्षक संगठन के बैनर तले ही होनी चाहिए। मैंने किसी दल के सामने घुटने नहीं टेके हैं और आगे भी नहीं टेकूंगा।
गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के निर्दलीय एमएलसी प्रत्याशी रहे राजीव यादव ने चुनाव परिणाम घोषित होने से पहले ही बीजेपी प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी को बधाई संदेश दिए जाने पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जब मतगणना के दौरान दोनों प्रत्याशियों के बीच कांटे की टक्कर चल रही थी, तब बीजेपी के कार्यकर्ताओं, एजेंटों और यहां तक कि जिलाध्यक्ष को भी पहले से पता था कि जीत ध्रुव कुमार त्रिपाठी की ही होगी। राजीव यादव का आरोप है कि इसी विश्वास के आधार पर मतगणना पूरी होने से पहले ही बीजेपी के लोगों ने बधाई संदेश देना शुरू कर दिया था। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मुकाबला इतना करीबी था तो आखिर किस आधार पर पहले से जीत का दावा किया जा रहा था?

बातचीत में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भी राजीव यादव से अहम सवाल किया गया। उनसे पूछा गया कि क्या भविष्य में कोई राजनीतिक दल उन्हें विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए टिकट देता है तो वह चुनावी मैदान में उतरेंगे? इस पर उन्होंने कहा कि शिक्षक, कर्मचारी और अधिकारी किसी जाति, धर्म या पार्टी के नहीं होते, बल्कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण उनके मुद्दे हैं। जो राजनीतिक दल शिक्षकों और कर्मचारियों की समस्याओं को हल करने की बात करेगा, वह उसका समर्थन करेंगे। उन्होंने पुरानी पेंशन बहाली, शिक्षकों को वेतनमान का लाभ, सेवा सुरक्षा से जुड़ी धारा 18, 12 और 21 की पुनर्बहाली तथा मदरसा शिक्षकों की कैफी शिक्षा और कामिल-फाजिल से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। राजीव यादव ने कहा कि जो भी सरकार या राजनीतिक दल इन मांगों को पूरा करने का भरोसा देगा, शिक्षक और कर्मचारी उसके साथ खड़े हो सकते हैं। हम शिक्षक, कर्मचारी और अधिकारी हैं। हमारी न कोई जाति है, न धर्म और न पार्टी। हमारे मुद्दे महत्वपूर्ण हैं। अगर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पुरानी पेंशन बहाल कर दें, सेवा सुरक्षा की धारा 18, 12 और 21 पुनः बहाल कर दें, शिक्षकों को वेतनमान का लाभ दे दें और मदरसा शिक्षकों की मांगें पूरी कर दें, तो मैं आज ही 2027 के लिए मुख्यमंत्री जी के पक्ष में नारा लगाऊंगा। मैं कहूंगा कि माननीय योगी जी को पुनः मुख्यमंत्री बनाया जाए। हमें अपने मुद्दों के समाधान से मतलब है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस और बातचीत के आखिर में जब राजीव यादव से पूछा गया कि उनके मुताबिक मतगणना में कथित धांधली किसके इशारे पर हुई और इसके पीछे किसका हाथ हो सकता है, तो उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम लेते हुए गंभीर आरोप लगाए। राजीव यादव ने कहा कि गोरखपुर में मुख्यमंत्री की मर्जी के बिना एक पत्ता भी नहीं हिल सकता। ऐसे में इतनी बड़ी घटना, जो पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है, वह मुख्यमंत्री की जानकारी और मर्जी के बिना कैसे हो सकती है? उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में मुख्यमंत्री की भी भूमिका हो सकती है। हालांकि ये सभी आरोप राजीव यादव के अपने दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है। गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी प्रत्याशी रहे राजीव यादव ने आगे कहा कि शहर में एक पत्ता भी माननीय मुख्यमंत्री जी की मर्जी के बिना नहीं हिल सकता। इतनी बड़ी घटना, जो पूरे देश की हॉट सीट बन गई थी, वहां मतगणना में ऐसा कैसे हो सकता है? जरूर कहीं न कहीं उनका भी छोटा-मोटा हिस्सा रहा होगा। फिलहाल गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव परिणाम घोषित हो चुका है और बीजेपी प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी 307 मतों से जीत दर्ज कर चुके हैं। लेकिन निर्दलीय प्रत्याशी रहे राजीव यादव के आरोपों ने चुनावी प्रक्रिया और मतगणना की पारदर्शिता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि निर्वाचन आयोग इन आरोपों पर क्या संज्ञान लेता है और राजीव यादव की फॉरेंसिक जांच तथा चुनाव निरस्त करने की मांग पर आगे क्या कार्रवाई होती है।
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