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यूक्रेन युद्ध के बाद पहली बार ‘विदेश’ दौरे पर पुतिन, कही ये बात, पढ़ें

रूस के राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार सोवियत संघ का हिस्‍सा रहे देशों के बाहर ईरान के दौरे पर जा रहे हैं। पुतिन ईरान के दौरे पर वहां के सर्वोच्‍च नेता अयातुल्‍ला अली खमनेई के साथ मुलाकात करेंगे।

By RNI Hindi Desk 
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रूस के राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार सोवियत संघ का हिस्‍सा रहे देशों के बाहर ईरान के दौरे पर जा रहे हैं। पुतिन ईरान के दौरे पर वहां के सर्वोच्‍च नेता अयातुल्‍ला अली खमनेई के साथ मुलाकात करेंगे।

रूस और ईरान दोनों का ही इस समय पश्चिमी देशों खासकर अमेरिका के साथ तनाव काफी बढ़ा हुआ है। ऐसे में माना जा रहा है कि पुतिन की इस यात्रा से ईरान और रूस दोनों ही पश्चिमी देशों को कड़ा संदेश दे रहे हैं।

रूस के राष्‍ट्रपति की यह ईरान यात्रा ऐसे समय पर हो रही है जब अभी हाल ही में अमेरिका के राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहाकर जैक सुल्‍लीवान ने कहा था कि हमारा खुफिया नेटवर्क बताता है कि ईरान रूस को कई हजार ड्रोन बेचना चाहता है। इन ड्रोन विमानों में कई हथियारों से लैस हैं और उनका इस्‍तेमाल यूक्रेन की जंग में किया जा सकता है।

उन्‍होंने कहा कि रूसी सेनाओं की ईरानी ड्रोन की ट्रेनिंग इस महीने कभी भी शुरू हो सकती है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यूक्रेन युद्ध की वजह से रूस के ड्रोन कम पड़ रहे हैं, यही वजह है कि उसे ईरान से मदद लेनी पड़ रही है। पुतिन के विदेशी नीति के सलाहकार यूरी उशाकोव ने कहा कि खमनेई के साथ मुलाकात बेहद अहम है।

यूरी ने कहा, ‘दोनों के बीच द्विपक्षीय और अंतरराष्‍ट्रीय अजेंडे को लेकर एक व‍िश्‍वसनीय समझ व‍िकसित हो गई है। ज्‍यादातार मुद्दों पर हमारी राय एक-दूसरे से काफी मिलती जुलती है या एक जैसी ही है।’

24 फरवरी को यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पुतिन की रूस के बाहर यह दूसरी यात्रा है। पिछले महीने रूसी नेता ने अपने प्रभाव वाले पूर्व सोवियत देश ताजिकिस्‍तान और तुर्कमेनिस्‍तान की यात्रा की थी। उनकी अंतिम बड़ी विदेशी यात्रा यूक्रेन युद्ध शुरू होने से ठीक पहले चीन में ओलंपि‍क के दौरान हुई थी।

रूसी राष्‍ट्रपति की यह यात्रा अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडन की खाड़ी देशों सऊदी अरब और इजरायल की यात्रा के ठीक बाद हो रही है। इस यात्रा के दौरान बाइडन ने इजरायल और सऊदी अरब को आश्‍वासन दिया था कि वह ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे। अमेरिका इस समय ईरान को मनाने की कोशिश कर रहा है कि वह साल 2015 के परमाणु डील में फिर से शामिल हो जाए।

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