अर्नब गोस्वामी की मुसीबतें काम होने का नाम नहीं ले रही है। रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी के चैट लीक होने के बाद से कई सवाल सामने गए है।
इन सवालों का जवाब देस की कई बड़ी राजनितिक पार्टी सरकार से मांग रही है।
इस इस मामले में सरकार ने चुप्पी सधी है। जिसको लेकर कई राजनीतिक पार्टी देश के प्रधानमंत्री और सरकार पर निशाना साध रही है। इस मामले पर शिवसेना कांग्रेस सही तमाम विपक्षी पार्टी सरकार पर हमलावर है।
पूर्व रक्षामंत्री ऐंटनी का कहा है कि यह एक अपराध है और इसके लिए अर्नब को सज़ा मिलनी ज़रूरी है। पार्टी ने कहा है कि इस मामले में तुरंत जांच के आदेश दिए जाने चाहिए।
ऐंटनी ने मीडिया को बताया, ‘इन दस्तावेजों से स्पष्ट है कि देश की सुरक्षा से जुड़ी अहम बातें लीक हुई हैं और इन बातों का लोगों तक इस तरह से पहुंचना एक चुनौती है। ये लोग ऐसी बातें पहले से जानने के लिए ऑथराइज्ड नहीं हैं।
उन्होंने आगे कहा कि आखिर एक पत्रकार को एयर स्ट्राइक के बारे में पहले से ही कैसे जानकारी हो गई। अगर इस तरह पहले से ही जानकारियां लीक हो जाती हैं तो ऑपरेशन पर भी इसका प्रभाव पड़ता है।’
ऐंटनी ने कहा कि सेना का टॉप अधिकारियों के अलावा सरकार में केवल चार से पांच लोगों को ही ऐसे ऑपरेशन की जानकारी होती है। उन्होंने कहा, ‘सेना की तरफ से ये जानकारियां लीक होना संभव नहीं है।
पूर्व रक्षामंत्री ने आगे कहा कीं इसके अलावा सरकार में जो शीर्ष पर सिविलियन होते हैं उनसे ही बात लीक हो सकती है। उसमें मंत्री भी शामिल हो सकते हैं। खास बात यह है कि इस ऑपरेशन के बारे में पूरे मीडिया को नहीं बल्कि एक खास पत्रकार को ही पता चला।’
इस ही सिलसिले में ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) के पूर्व CEO पार्थो दासगुप्ता के साथ रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी की करीब एक हजार पेज की वॉट्सऐप चैट्स मुंबई क्राइम ब्रांच ने अपनी चार्जशीट में शामिल की हैं।
इन चैट्स में कुछ बातचीत दो साल पहले भारत की बालाकोट में की गई सैन्य कार्रवाई से भी जुड़ी हुई हैं, जिसकी जानकारी अर्नब को पहले से थी। वॉट्सऐप चैट्स सोशल मीडिया पर लीक होने के बाद मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र सरकार से सवाल पूछा जा रहा है कि ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट में अर्नब और दासगुप्ता के खिलाफ क्या कोई एफआईआर दर्ज होगी?
इस केस की जांच से जुड़े एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने मंगलवार को एनबीटी को मुंबई पुलिस की कानूनी मजबूरियों के बारे में समझाया, और कहा कि यह दो लोगों के बीच प्राइवेट चैट्स है। फिर इस चैट्स में बालाकोट पर भारत सरकार की संभावित कार्रवाई का जो जिक्र है, वह देश की सुरक्षा से जुड़ा मामला है।
कायदे से इस मामले में केंद्र सरकार को शिकायतकर्ता बनना चाहिए और मुंबई पुलिस में एफआईआर दर्ज करनी चाहिए। लेकिन क्या केंद्र सरकार ऐसा करेगी, इस अधिकारी के अनुसार, यह केंद्रीय गृह मंत्रालय को तय करना है।
गृहमंत्री अनिल देशमुख ने कहा कि मुंबई पुलिस या राज्य सरकार इस बारे में केंद्र सरकार को आदेश नहीं दे सकती। सिर्फ अपनी बात पहुंचा सकती है। मंगलवार को महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने मीडिया के जरिए अपनी बात केंद्र तक पहुंचाई भी है।