केंद्र सरकार द्वारा लाये गए कृषि कानून को लेकर जहां देश भर में आंदोलन चल रही है। वही देश के किसान इस कानून को वापस लेने की मांग कर रहे है। वही दूसरी तरफ सरकार ने ये साफ़ कर दिया है की वह इस कानून को वापस नहीं लगे बल्कि संशोधन किया जायेगा।
वही आज कृषि कानून को लेकर चल रहे प्रदर्शन को एक महीना होने वाला है। आज प्रदर्शन का 29वां दिन है। सरकार ने किसानो को कहा है की वह उनसे बात करने के लिए तैयार है। पर किसान सरकार से बात नहीं करना चाहती है।
केन्द्रीय कृषि कानूनों का एक तरफ जहां भारी विरोध किया जा रहा है और पिछले 26 दिनों से राष्ट्रीय राजधानी और इसके आसपास आकर किसान आंदोलन कर रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ इस कानून के समर्थन में भी कई किसान संगठन सामने आए हैं और केन्द्र सरकार से इसमें किसी भी तरह का बदलाव ना करने को कह रहे हैं।
मंगलवार को गौतम बुद्ध नगर के किसान संघर्ष समिति और भारतीय किसान यूनियन के प्रतिनिधियों ने कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर से मुलाकात कर नए कृषि संबंधी कानूनों में किसी तरह के संशोधन ना करने की अपील की।
केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा- “उत्तर प्रदेश के कुछ किसान नेताओं ने आज आकर मुलाकात की और कृषि कानूनों पर अपना समर्थन दिया. उन्होंने कहा कि इन तीनों कानूनों पर किसी तरह का संशोधन नहीं किया जाना चाहिए.” उन्होंने आगे कहा- किसान नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का धन्यवाद किया और कहा कि इन कानूनों से किसानों की स्थिति सुधरेगी और उन्होंने इसे वापस ना लेने की अपील की।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और इसके आसपास हजारों की संख्या में किसानों के प्रदर्शन कर रहे है। तीनों कृषि कानूनों की वापसी की अपनी जिद पर किसान संगठन अड़े हुए हैं।
इधर, राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस का एक प्रतिनिधिंडल इस मामले पर 24 दिसंबर को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात करेगा। राहुल गांधी की अगुवाई वाले प्रतिनिधिमंडल की तरफ से राष्ट्रपति को कृषि कानूनों के विरोध में इकट्ठा किए गए 2 करोड़ लोगों के हस्ताक्षर भी सौंपे जाएंगे।
कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने कहा- कृषि कानूनों को वापस करने के अनुरोध वाले हस्ताक्षर देशभर से इकट्ठे किए गए हैं। यह 24 दिसंबर को राहुल गांधी की अगुवाई वाले कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल की तरफ से राष्ट्रपति को सौंपा जाएगा।
गौरतलब है कि राजधानी दिल्ली और इसके आसपास आकर नए कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन करने वाले किसानों में अधिकतर पंजाब और हरियाणा से हैं। सरकार के साथ किसानों की अब तक पांचवें दौर की बातचीत हो चुकी है। लेकिन, इस बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकल पाया।