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कार्यपालन यंत्री पर वित्तीय अनियमितता का आरोप, व्यक्ति विशेष को पहुंचाया लाखों रुपए का आर्थिक लाभ!

जल संसाधन संभाग पन्ना में वाहनों के भुगतान में अपनाई जा रही अलग-अलग प्रक्रिया। ईएनसी के निर्देशों की अवहेलना कर वाहन मालिक को 29 लाख से अधिक का भुगतान।

By: Naredra 
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कार्यपालन यंत्री पर वित्तीय अनियमितता का आरोप, व्यक्ति विशेष को पहुंचाया लाखों रुपए का आर्थिक लाभ!

पन्नाः गुणवत्ताहीन निर्माण कार्यों एवं आर्थिक अनियमितता के लिए बदनाम कार्यालय जल संसाधन संभाग पन्ना में बड़ा घोटाला उजागर हुआ है। कार्यपालन यंत्री सतीष शर्मा पर व्यक्ति विशेष को आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए गंभीर वित्तीय अनियमितता करने के आरोप लगे हैं।

विभागीय दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि कार्यपालन यंत्री द्वारा अपने स्वयं के उपयोग के लिए लगाए गए वाहन के भुगतान में शासन के स्पष्ट नियमों और प्रमुख अभियंता के निर्देशों की जानबूझकर अनदेखी कर 29.55 लाख रुपए से अधिक राशि का भुगतान किया गया। जबकि कार्यालयीन अनुविभागीय अधिकारियों (एसडीओ) के लिए लगाए गए वाहनों के डीजल भुगतान में अलग प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

शासकीय कार्य हेतु टैक्सी/वाहन किराए पर लिए जाने के संबंध में कार्यालय प्रमुख अभियंता, जल संसाधन विभाग, भोपाल द्वारा विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इस पत्र में बताया गया है शासकीय वाहन उपलब्ध न होने पर किराए पर वाहन अधीक्षण यंत्री की अनुमति से लगाए जा सकते हैं। जिसमें कार्यपालन यंत्री तथा अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) के लिए वाहन पर डीजल एवं किराया का कुल मासिक व्यय की अधिकतम लिमिट क्रमशः 630D/550D निर्धारित की गई है। 24 शर्तों वाले पत्र में स्पष्ट किया गया है कि ‘D’ का अर्थ अधीक्षण यंत्री के मुख्यालय पर उपलब्ध न्यूनतम डीजल दर प्रति लीटर टैक्स सहित है।

पत्र के बिंदु क्रमांक 2 में स्पष्ट उल्लेख है, प्रमुख अभियंता एवं शासन के आदेशों में कहीं विरोधाभास होने पर शासन के आदेश का पालन किया जाएगा। इसी तरह बिंदु क्रमांक 6 में कहा गया है ‘वाहन का मालिक विभाग के किसी भी प्रथम अथवा द्वितीय श्रेणी अधिकारी का निकट या दूर का रिश्तेदार नहीं होना चाहिए। यदि रिश्तेदार होना पाया जाता है, तो भुगतान किए गए किराए की दुगुनी राशि सिंचाई राजस्व में उस अधिकारी के वेतन से जमा कराई जाएगी साथ ही दंडित भी किया जाएगा।’

कार्यपालन यंत्री सतीष शर्मा ने जल संसाधन संभाग पन्ना में माह अगस्त 2021 को अपनी पदस्थापना के बाद से ही हद दर्जे की मनमानी करते हुए तेल का खेल शुरू कर दिया था। मुख्य अभियंता कार्यालय सागर के एक विश्वसनीय सूत्र से प्राप्त दस्तावेजों को देखने से पता चलता है कि शर्मा द्वारा अपने स्वयं के लिए लगाए गए वाहन के प्रत्येक मासिक भुगतान में डीजल के बिलों को कार्यालय में उपलब्ध नहीं कराया जाता।

डीजल के बिल प्रस्तुत कराए बगैर ही माह सितंबर 2021 से वाहन का कुल भुगतान (वाहन किराया+डीजल) 630D की लिमिट के आधार पर वाहन मालिक के खाते में माह दिसंबर 2025 तक लगातार किया जाता रहा है। कार्यपालन यंत्री द्वारा अपने लिए लगाए गए वाहन के मासिक भुगतान में प्रमुख अभियंता के निर्देशों की खुली अवहेलना की गई। डीजल के बिल कार्यालय में उपलब्ध कराए बगैर ही 52 माह का कुल भुगतान (वाहन किराया+डीजल) रुपए 29,55,996/- किसी व्यक्ति विशेष (वाहन मालिक) के खाते में किया गया। जबकि नियमानुसार वाहन के डीजल के बिल कार्यालय में उपलब्ध कराए जाने के बाद संबंधित पेट्रोल पम्प मालिक को इसका भुगतान किया जाना चाहिए था।

जल संसाधन संभाग पन्ना में किराए पर लगाए गए वाहनों के भुगतान में नियम विरुद्ध अलग-अलग प्रक्रिया अपनाए जाने पर कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सबसे हैरानी की बात तो यह है कि, कार्यपालन यंत्री की कारगुजारी का कच्चा चिट्ठा सप्रमाण जनवरी 2026 में प्रमुख अभियंता भोपाल तथा मुख्य अभियंता सागर को भेजा गया था लेकिन शीर्ष अधिकारियों ने लाखों रुपए के नियम विरुद्ध भुगतान पर अब तक कोई एक्शन नहीं लिया। शीर्ष अफसरों द्वारा जानबूझकर की जा रही इस अनदेखी से जल संसाधन विभाग में भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है।

पन्ना से संवाददाता राजेश रावत की रिपोर्ट

 

 

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