रिपोर्ट – माया सिंह \ अनुज कुमार
कानपुर : देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर में मामले तेजी से बढ़ते ही जा रहे हैं । ऐसे में कोरोना के गंभीर मरीजों को दिये जाने वाले इंजेक्शन रेमडेसिविर की बाजारों में कमी हो गई है । ऐसी स्थिति में लोग एक – दूसरे की मदद कर इंसानीयत की मिसाल पेश कर रहे हैं , तो दूसरी और कुछ ऐसे भी नफाखोर लोग हैं जो इस महामारी में भी काला धंधा करने से बाज नहीं आ रहे हैं । एक ऐसा ही मामला उत्तर प्रदेश के कानपुर से सामने आया है । जहां STF ने मिलिट्री इंटेलिजेंस इनपुट पर इंजेक्शन के 265 वॉयल के तीन तस्करों को पकड़ा है । रेमडेसिवर इंजेक्शन की तस्करी करने का देश में यह पहला मामला सामने आया है ।

जानकारी के मुताबिक मिलिट्री इंटेलिजेस लखनऊ की सूचना पर एसटीएफ ने बाबूपुरवा पुलिस के सहयोग से तीन तस्करों को गिरफ्तार किया है। साथ ही 265 रेमडेसिविर इंजेक्शन बरामद किये गये हैं । फिलहाल तस्करों से पूछताछ की जा रही है ।

दरअसल , मिलेट्री इंटेलीजेंस को सूचना मिली थी कि कोलकत्ता से रेमडेसिविर इंजेक्शन की बड़ी खेप कानपुर भेजी जा रही है। जहां कानपुर के नौबस्ता खाड़ेपुर में रहने वाले मोहन सोनी रिसीव करने वाला है । फिर क्या था एसटीएफ ने बाबूपुरवा पुलिस के साथ मौके पर पहुंचकर नौबस्ता के मोहन सोनी, प्रशांत शुक्ला और हरियाणा निवासी सचिन को अरेस्ट कर लिया।

इस मामले की जांच की जिम्मेवारी फूड ऐंड ड्रग्स विभाग के अधिकारी को सौंपी गई है , इसके बाद सभी पर विधिक कार्रवाईकी जाएगी । बता दें कि बरामद किए गए इंजेक्शन पर बैच नंबर या अन्य संबंधित जानकारी अभी तक नहीं मिली है। हालांकि आरोपियों से पूछताछ पर पता चला कि इस इंजेक्शन की कीमत बाजारों में 5400 रूपये है , जबकि मौके का फायदा उठाते हुये कालाबाजारी के तौर पर मनमानी कीमत पर इसे बेचा जा रहा था ।

गौरतलब है कि कोरोना के बढ़ते कहर के वजह से रेमडेसिविर इंजेक्शन की कमी पड़ गई थी । इस इंजेक्शन की भारी मांग पर यूपी सरकार ने गुजरात से इंजेक्शन को स्टेट प्लेन से मंगवाया था । ताकि मरीजों को समय से रेमडेसिवर इंजेक्शन दिया जा सके ।