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आंधी-तूफान और भारी ओलावृष्टि से खेतों में तबाही, किसानों की सालभर की मेहनत पर फिरा पानी

आठनेर सहित जिले में कई जगहों पर फसल हुई बर्बाद। मक्का के नुकसान से उबर नहीं पाए थे किसान कि गेहूं पर फिर प्रकृति का प्रहार। राहत और ऋण मोहलत की मांग तेज।

By: Naredra 
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आंधी-तूफान और भारी ओलावृष्टि से खेतों में तबाही, किसानों की सालभर की मेहनत पर फिरा पानी

बैतूलः अचानक तेज तूफान और ओलावृष्टि ने किसानों की जिंदगी को झकझोर कर रख दिया है। आठनेर सहित कई क्षेत्रों में तेज आंधी, बारिश और ओलों ने खेतों में खड़ी फसलों को पूरी तरह तबाह कर दिया। हर तरफ सिर्फ बर्बादी का मंजर नजर आ रहा है और किसान गहरे संकट में डूबता दिखाई दे रहा है। किसान इस बार प्रकृति के लगातार प्रहार से टूटता नजर आ रहा है। पहले मक्का की फसल में कम उत्पादन और गिरते दामों ने किसानों को आर्थिक संकट में डाल दिया। किसान अभी उस नुकसान से उबर भी नहीं पाए थे कि बड़ी उम्मीदों के साथ तैयार की गई गेहूं की फसल भी कुदरत के कहर की भेंट चढ़ गई।

किसान दो तरफा मार झेलने को मजबूर

प्राकृतिक आपदा के इस दौर में किसानों को दो तरफा मार झेलनी पड़ रही है। एक ओर फसलें बर्बाद हुई हैं, तो दूसरी ओर ऋण अदायगी की समय सीमा ने किसानों पर अतिरिक्त दबाव बना दिया है। खरीफ सीजन 2025 के कर्ज की अंतिम तिथि 28 मार्च तय होने से कई किसान डिफॉल्टर की श्रेणी में पहुंच गए हैं। अब किसानों की मांग है कि सरकार तुरंत सर्वे कर राहत राशि प्रदान करे और ऋण अदायगी की अंतिम तिथि बढ़ाकर कम से कम 30 अप्रैल की जाए, ताकि उन्हें इस संकट की घड़ी में राहत मिल सके।

बैतूल से संवाददाता कमलाकर तायवाड़े की रिपोर्ट

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