रिपोर्ट – माया सिंह
नई दिल्ली : दिल्ली पुलिस ने कोविड-19 की फर्जी रिपोर्ट बनाने वाले एक गैंग का पर्दाफाश किया है । इसमें डॉक्टर और उसके सहयोगि दो लैब टेक्नीशियन समेत पांच गिरफ्तार किये गये हैं । एक तरफ जहां हर रोज कोरोना के हजारो नये मामले सामने आ रहे हैं , वहीं दूसरी ओऱ कुछ लोगों ने कोरोना टेस्टिंग को धोखाधड़ी से कमाई का जरिया बना लिया है ।
जानकारी के मुताबिक साउथ दिल्ली की मालवीय नगर थाना पुलिस ने कोविड टेस्ट के रिपोर्ट में गड़बड़ी करने वाले गिरोह का भंड़फोड़ किया है , जिसमें डॉक्टर मनीष , लैब टेक्नीशियन निहाल , हिमांशु के के साथ ही इस धोखाधड़ी में शामिल अन्य दो सतेन्द्र और निखिल को भी हिरासत में लिया है । पुलिस की माने तो निहाल और हिमांशु जाकर लोगों के सैंपल कलेक्ट किया करते थे ।
पुलिस का कहना है कि मालवीय नगर थाना के एक लैब में निहाल , हिमांशु और डॉक्टर मनीष कार्यरत थे । वहीं से वे नकली रिपोर्ट बनाकर लोगों को ठगा करते थे । हैरानी की बात है कि लैब अधिकारियों को इस करनामें की भनक तक नहीं थी ।
पुलिस ने बताया कि 29 अप्रैल रात साढे नौ किसी ने फोन करके शिकायत किया कि वहां पर कुछ लोग बिना जांच किए कोविड 19 के सर्टिफिकेट बना रहे हैं । सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई और शिकायत के मुताबिक छानबीन शुरू कर दिया है ।
मौजूद कलॉर विपुल सैनी ने बताया कि 45 लोगों ने हिमांशु और निहाल शर्मा को कोविड की जांच के लिए सैंपल दिए थे ।
दरअसल , विपुल के जानकार ऋषभ ने भी इस लैब में सैंपल दिया था , जिसमें उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई जबकि कोई लक्षण नहीं था और नाहि किसी प्रकार की उसे समस्या थी ।
रिपोर्ट को लेकर शक हुआ तो उन्होंने किसी दूसरे लैब में टेस्ट काराया तो रिपोर्ट निगेटिव आई । इसके बाद रिपोर्ट लेकर दोनो उस लैब पहुंचे जहां गलत रिपोर्ट दिया गया था तो वहां एक ऐसा खुलासा हुआ कि दोनों चौंक गये।
वहां जांच में पाया गया कि उस लैब के रिकॉर्ड में उनकी एंट्री ही नही थी । असल में हिमांशु और निहाल लोगों के सैंपल लेकर डॉक्टर मनीष को दिया करते थे , वे इसकी एंट्री नहीं करते थे और बाद में एक एक्सेल शीट बनाकर मनीष के मोबाईल पर भेज देते थे और मनीष पिंट आउट निकलवाकर आगे भेज देता था।
इस जांच के बाद आरोपियों को गिरफ्तार करने के साथ ही उनके पास से 5 मोबाईल फोन के साथ ही दो लैपटॉप बरामद किया है , जिससे वे फर्जी रिपोर्ट तैयार करते थे ।