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लॉकडाउन की स्थिति का जायज़ा लेने निकले कलेक्टर, महिला सिपाही ने रोक लिया, पूछा कहां जा रहे हो?

By: RNI Hindi Desk 
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लॉकडाउन की स्थिति का जायज़ा लेने निकले कलेक्टर, महिला सिपाही ने रोक लिया, पूछा कहां जा रहे हो?

रिपोर्ट: सत्यम दुबे

भीलवाड़ा: कोरोना महामारी के दूसरे लहर का कहर लगातार जारी है। कोरोना से संक्रमित मरीज ऑक्सीजन और दवाईयों की कमीं से लगातार दम तोड़ रहें हैं। महामारी के दूसरे लहर ने कई हंसते-खेलते परिवारों को तबाह कर रहा है। मौजूदा वक्त में कोरोना महामारी ने देश को चपेट में ले लिया है। महामारी को मात देने के लिए शासन और प्रशासन देश के लगभग सभी प्रदेशों में लॉक डाउन लगा दिया है। इसके साथ ही   बेवजह सड़क पर निकले को लेकर पुलिस ने सख्ती भी बढ़ा दिया है। वहीं फिजूल घुमने वालों से जुर्माना भी वसूला जा रहा है।

इन सब के बीच राजस्थान के भीलवाड़ा जिला कलेक्टर मंगलवार को शहर में लॉकडाउन की स्थिति का जायज़ा लेते हुए जब शहर के भीतरी इलाके में पहुंचे तो उन्हें एक लेडी पुलिस कांस्टेबल ने रोक लिया। साइकिल पर सवार होकर निकले कलेक्टर से सिपाही ने पूछ लिया कि लॉकडाउन लगा हुआ है, कहां जा रहे हो? हालांकि कलेक्टर से डांट के बजाय यहां सिपाही को उसकी मुस्तेदी के लिये सराहना मिली।

दरअसल, साइकिल पर आते एक युवक को रोकती यह महिला कांस्टेडबल भीलवाड़ा के भीतर इलाके में अपनी ड्यूटी दे रही थी। उसे पता नहीं था कि साइकिल पर सवार युवक कलेक्टटर शिव प्रसाद एम नकाते हैं। हुआ यूं कि मंगलवार को भीलवाड़ा कलेक्टसर शिव प्रसाद एम नकाते शहर में साइकिल पर स्थिती का जायजा करने निकले। ड्यूटी पर तैनात महिला पुलिसकर्मी निर्मला को आभास था कि आज कलेक्ट र दौरा कर रहे हैं वो कलेक्टमर की लाल बत्तीा की गाड़ी और गनमैन की उम्मीसद में थी।

ऐसे में साइकिल पर आते एक युवक को उसने रोककर पूछा कहां जा रहे हो। कलेक्टकर शिव प्रसाद एम नकाते ने महिला सिपाही की इस मुश्तैउदी की सराहना की है। इसके बाद कलेक्ट़र विभिन्नए नाकों पर तैनात पुलिस जवानों से भी मिले।

आपको बता दें कि कांस्टेबल निर्मला ने बताया कि वह और उनका बेटा दोनों कोरोना पॉजिटिव हो चुके हैं। इसलिए वह नहीं चाहती कि कोई और भी कोरोना की चपेट में आए। निर्मला का कहना है कि आंकड़े कम हुए हैं, कोरोना नहीं। वह कोरोना के दर्द को जानती हैं, इसलिए लोगों से अपील कर रही हैं कि घर में रहो। बकौल निर्मला अब कलेक्टर साब को क्या पड़ी है जो वह आपके लिए सुबह-सुबह सड़कों पर घूमकर समझा रहे हैं। बीमारी की गंभीरता को समझें।

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