स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा बने ‘वंदे मातरम्’ गीत के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आज से पूरे देश में ‘वंदे मातरम् @150’ अभियान की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज भोपाल के शौर्य स्मारक और भाजपा प्रदेश कार्यालय में वंदे मातरम् के मूल स्वरूप में सामूहिक गायन कर इस ऐतिहासिक अभियान का शुभारंभ किया।
शौर्य स्मारक में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ मंत्री कृष्णा गौर, विश्वास सारंग, सांसद आलोक शर्मा, विधायक भगवानदास सबनानी, रामेश्वर शर्मा, महापौर मालती राय, एसीएस अशोक वर्णवाल, प्रमुख सचिव राघवेंद्र सिंह, डीजीपी कैलाश मकवाना, भोपाल पुलिस कमिश्नर हरि नारायण चारी मिश्रा सहित भाजपा के वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि “वंदे मातरम् का मूल मंत्र सदैव हमें राष्ट्रप्रेम और आत्मबल की प्रेरणा देता रहा है।”
उन्होंने कहा — “हर देश में जब स्वतंत्रता की भावना जागृत होती है, तो वंदे मातरम् जैसे गीतों से एक अद्भुत ऊर्जा और संकल्प का संचार होता है। यह गीत केवल शब्द नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का संगीत है।”

मुख्यमंत्री ने पुलिस बैंड द्वारा प्रस्तुत ‘कदम कदम बढ़ाए जा’ गीत की भी सराहना की और कहा कि यह गीत आजादी के संघर्ष की अमर ध्वनि है। उन्होंने बताया कि वंदे मातरम् की रचना में भारत की त्रिदेवियों – दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती को शक्ति, समृद्धि और ज्ञान का प्रतीक मानकर जोड़ा गया है। “वंदे मातरम् भारत माता के साथ-साथ हमारी सांस्कृतिक शक्ति का भी प्रतिनिधित्व करता है।”
सीएम ने कहा कि 19वीं शताब्दी से शुरू हुई यह प्रेरणादायक यात्रा आज भी राष्ट्र के भीतर ऊर्जा भरती है। “अतीत के अप्रतिम गीतों ने स्वतंत्रता की अलख जगाई। आज जब हम 150 वर्ष पूरे कर रहे हैं, तब यह गीत फिर से देशभक्ति की भावना को प्रज्वलित कर रहा है।”
इस अभियान के तहत मध्यप्रदेश के सभी 10 संभागों — भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, सागर, उज्जैन, चंबल, नर्मदापुरम और शहडोल — में विशेष आयोजन किए जा रहे हैं। हर स्थान पर वंदे मातरम् गायन के बाद ‘स्वदेशी अपनाने का संकल्प’ भी लिया जाएगा। इन आयोजनों में भाजपा के मंत्री, सांसद, विधायक, प्रदेश पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।
‘वंदे मातरम् @150’ अभियान 7 नवंबर से 26 नवंबर (संविधान दिवस) तक चलेगा। इस दौरान पूरे प्रदेश में सभी जिलों, शैक्षणिक संस्थानों, और सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। प्रदेशभर में इस अवधि में सांस्कृतिक कार्यक्रम, देशभक्ति गीत गायन, और प्रेरक रैलियों का आयोजन किया जाएगा।
‘वंदे मातरम्’ गीत की रचना बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने 1870 के दशक में की थी। यह गीत आज़ादी की लड़ाई के दौरान राष्ट्रवादी भावनाओं का प्रतीक बना और भारत के स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी। आज भी यह गीत भारत के राष्ट्रीय प्रतीकों में शामिल है और देशवासियों के लिए अभिमान का प्रतीक बना हुआ है।