दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर किसानों के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए उसे नए कृषि कानूनों पर किसान नेताओं के साथ बहस करने की चुनौती दी है।
उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के साथ रविवार शाम सिंघु बॉर्डर पहुंचे केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर किसानों से खेती छीनने की कोशिश करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की और इस बात पर दुख जताया कि किसानों को राष्ट्रद्रोही कहा जा रहा है।
दिल्ली के सीएम ने कहा, “मैं केंद्र सरकार से अपील करता हूं, इनकी बातें सुनकर कृषि के तीनों कानूनों को वापस ले लीजिए। किसानों को राष्ट्रद्रोही कहा जा रहा है, अगर किसान राष्ट्रद्रोही हो गया तो तुम्हारा पेट कौन भरेगा? किसानों की खेती चली गई तो किसान कहां जाएगा? किसानों के पास क्या बचेगा?” उन्होंने विपक्ष पर किसानों को गुमराह करने के आरोपों पर भी पलटवार किया।
केजरीवाल ने केंद्र को चुनौती दी कि वो अपने सबसे दमदार मंत्री को सिंघु बॉर्डर पर भेज कर किसान नेताओं के साथ बहस करवा ले। उन्होंने कहा, “केंद्र सरकार आरोप लगा रही है कि किसानों को गुमराह किया जा रहा हैं।
उन्होंने आगे कहा मैं केंद्र सरकार को चुनौती देता हूं, केंद्र सरकार अपने सबसे बड़े नेता को लेकर आ जाए और हमारे किसान नेता आ जाएं और पब्लिक में चर्चा हो जाए, पता चल जाएगा किसको कितनी जानकारी है।
कृषि से जुड़े केंद्र के काले कानूनों को लेकर केंद्र सरकार के मंत्रियों और किसान नेताओं के बीच एक खुली बहस होनी चाहिए। पूरे देश को पता चल जाएगा कि ये कानून कितने ख़तरनाक हैं। pic.twitter.com/ihFILkuCxy
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) December 27, 2020
सिंघु बॉर्डर के पास गुरु तेग बहादुर स्मारक पहुंचे केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर नए कृषि कानूनों के जरिए किसानों से उनकी खेती-किसान का सीधा-सीधा आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “ये तीन कानून लेकर आए हैं, इन तीनों कानूनों के जरिए अब ये इनकी खेती भी छीनना चाहते हैं। उनकी खेती भी उठाकर अपने 2-3 बड़े-बड़े पूंजीपति दोस्तों को देना चाहते हैं। अगर किसान की खेती भी चली गई तो किसान कहां जाएगा।”
नवंबर के आखिरी हफ्ते से सिंघू बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे हजारों किसानों से मिलने दूसरी बार पहुंचे केजरीवाल ने कहा, ‘‘ मैं किसी भी केंद्रीय मंत्री को चुनौती देता हूं कि वह किसानों के साथ खुली बहस करें जिससे पता चल जाएगा कि ये कृषि कानून लाभदायक हैं या हानिकारक।’’
मुख्यमंत्री केजरीवाल के साथ उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी थे। इससे पहले केजरीवाल सात दिसंबर को दिल्ली-हरियाणा के सिंघू बॉर्डर पर किसानों से मिलने गए थे। अरविंद केजरीवाल ने कहा, ‘‘ किसान अपने जीवन के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं. ये कानून उनकी भूमि छीन लेगा। मैं हाथ जोड़कर केंद्र से अपील करता हूं कि वह कृपा कर इन तीनों कृषि कानूनों को वापस ले।’’
मनीष सिसोदिया ने प्रदर्शनकारी किसानों से कहा, ‘‘हम सभी व्यवस्थाओं पर करीब से नजर रख रहे हैं और सुनिश्चित कर रहे हैं कि आपको (किसानों को) कम से कम परेशानी हो।’’ सिंघू बॉर्डर के दौरे में केजरीवाल ने दिल्ली सरकार द्वारा की गई व्यवस्था का भी जायजा लिया।
गौरतलब है कि केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी केंद्र के कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों का मजबूती से समर्थन कर रही हैं। सिंघू बॉर्डर के अलावा किसान जिनमें से अधिकतर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के हैं, दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं।
बता दें कि किसानों ने सरकार से अगले दौर की बातचीत के लिए 29 दिसंबर को 11 बजे का समय तय किया है। बातचीत के लिए किसानों ने सरकार के सामने चार शर्तें रखी हैं, जिसमें तीनों नए कृषि कानूनों को रद्द किए जाने की मांग है।