भाजपा के फायरब्रांड नेता योगी आदित्यनाथ फिर चर्चा में
बिहार विधानसभा चुनाव में सभी 243 सीटों के परिणाम आ चुके हैं और 125 सीटें हासिल करते हुए एनडीए ने राज्य में एक बार फिर से सरकार बनाने की तरफ कदम बढ़ा दिए हैं। हालांकि जेडीयू को बिहार में कम सीटें मिली हैं लेकिन भाजपा ने साफ तौर पर कह दिया है कि सीएम नीतीश कुमार ही होंगे।
एनडीए को मिली 125 सीटों में से 74 पर भारतीय जनता पार्टी ने जीत का परचम लहराया है और भाजपा बिहार की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। बिहार में एनडीए की जीत में भाजपा की भगवा रणनीति और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की चुनावी रैलियों को काफी अहम माना जा रहा है।
बिहार में तीन चरणों के तहत हुए चुनाव में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने जिन 18 सीटों पर रैलियां की, उनमें से 11 सीटें एनडीए के खाते में गई हैं। इस तरह बिहार चुनाव में सीएम योगी का स्ट्राइक रेट 60 फीसदी से ऊपर रहा है।
योगी आदित्यनाथ ने बिहार की बख्तियारपुर, बिस्फी, कटिहार, केवटी, सीतामढ़ी, रक्सौल, वाल्मीकि नगर, झंझारपुर, लालगंज, दारौंदा, जमुई, काराकाट, गरिया कोठी, सीवान, अरवल, पालीगंज, तरारी और रामगढ़ सीट पर रैलियां की थी।
इन 18 सीटों में से एनडीए को केवल बख्तियारपुर, काराकाट, सीवान, अरवल, पालीगंज, तरारी और रामगढ़ में हार मिली है। जिन सात सीटों पर एनडीए को हार मिली है, उनमें से 4 सीटें लेफ्ट पार्टियों, 2 सीटें आरजेडी और 1 सीट बीएसपी के खाते में गई हैं।
भाजपा से जुड़े सूत्रों ने बताया कि स्टार प्रचारक के तौर पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने जिन सीटों पर रैलियां की, वहां वोटरों का झुकाव एनडीए की तरफ हुआ और बीजेपी-जेडीयू गठबंधन को फायदा हुआ।