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बिकरू कांड मामले में योगी सरकार की बड़ी कार्रवाई, कुर्क होंगी इन 14 आरोपियों की संपत्ती, सामने आया ये नाम

बिकरू कांड मामले में योगी सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 14 आरोपियों की संपत्ति को कुर्क करने का आदेश दिया है। आपको बता दें कि इस मामले में बिल्हौर पुलिस लगातार संपत्तियों का ब्यौरा जुटा रही है। गौरतलब है कि गैंगस्टर की कार्रवाई के बाद हर आरोपी की संपत्ति कुर्क करने का प्रावधान है।

By Amit ranjan 
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नई दिल्ली : बिकरू कांड मामले में योगी सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 14 आरोपियों की संपत्ति को कुर्क करने का आदेश दिया है। आपको बता दें कि इस मामले में बिल्हौर पुलिस लगातार संपत्तियों का ब्यौरा जुटा रही है। गौरतलब है कि गैंगस्टर की कार्रवाई के बाद हर आरोपी की संपत्ति कुर्क करने का प्रावधान है।

आपको बता दें कि बिल्हौर पुलिस ने बिकरू कांड के 14 आरोपियों के खिलाफ करीब एक साल पहले गैंगस्टर की कार्रवाई की थी। अब तक चुप्पी साधे बैठी बिल्हौर पुलिस ने आठ सितंबर 2021 को राजस्व परिषद के अध्यक्ष को पत्र लिखकर आरोपियों की प्रदेशभर की चल अचल संपत्तियों का ब्यौरा मांगा था।

इस पर राजस्व परिषद के अध्यक्ष मुकुल सिंघल ने बिल्हौर पुलिस को जवाब दिया कि हर व्यक्ति का ब्यौरा उनके पास नहीं होता। वे जिला प्रशासन की मदद से संपत्तियों का ब्यौरा खुद जुटाएं। इसके लिए जिला प्रशासन से समन्वय स्थापित करने को कहा।

वहीं इसे लेकर जिलाधिकारी को भी एक पत्र लिखा गया। जिसमें उन्हें गैंगस्टर के सभी आरोपियों की चल अचल संपत्तियों की जानकारी उपलब्ध कराने में बिल्हौर पुलिस का सहयोग करने को कहा गया। ऐसा माना जा रहा है कि अब जल्द ही इस मामले में बड़ी कार्रवाई होगी।

इनकी संपत्तियों का जुटाया जा रहा ब्यौरा

हीरू दुबे, श्याम बाजपेई, जहान यादव, दयाशंकर अग्निहोत्री, संजय दुबे, अरविंद त्रिवेदी, सुशील कुमार तिवारी, बबलू मुसलमान, रामू वाजपेयी, शशिकांत पांडेय, शिव त्रिपाठी, विष्णु पाल, शिवम दुबे, राम सिंह यादव।

गैंगस्टर मामले में जय समेत चारों भाइयों पर आरोप तय

गैंगस्टर मामले में जयकांत बाजपेई और उसके तीनों भाइयों अजयकांत, रजयकांत व शोभित के खिलाफ सोमवार को विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट मो. शफीक की अदालत में आरोप तय कर दिए गए। जिनकी पेशी जय की माती जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हुई, बाकी तीनों भाई अदालत में हाजिर रहे।

आरोपियों की ओर से पिछली तारीख में गलत विवेचना का आरोप लगाकर अग्रिम विवेचना कराए जाने के लिए कोर्ट में अर्जी दी गई थी। इस संबंध में कई तर्क व विधि व्यवस्थाएं भी रखी गईं। वहीं अभियोजन ने इसे प्रशासनिक क्षेत्राधिकार बताते हुए खारिज करने की मांग की। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने अर्जी खारिज कर दी है।

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