Home उत्तर प्रदेश बलिया : आस्था का पर्व हिन्दू धर्म में कार्तिक पूर्णिमा का विशेष महत्व

बलिया : आस्था का पर्व हिन्दू धर्म में कार्तिक पूर्णिमा का विशेष महत्व

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बलिया में कार्तिक पूर्णिमा के स्नान का विशेष महत्व है। हर साल यहाँ कई जिलों व कई राज्यों से लाखों की तादाद में लोग आते हैं। स्नान के बाद स्नानार्थी बलिया शहर के स्थित महर्षि भृगु एवं बालेश्वर नाथ के मंदिर का दर्शन करते हैं। कार्तिक पूर्णिमा से ही बलिया के ऐतिहासिक ददरी मेले की शुरूआत हो जाती है।

ददरी मेला भारत का दूसरा सबसे बड़ा मवेशी मेला है, कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा नदी में स्नान व पवित्र डुबकी लेने वाले लोगों के साथ शुरू होता है। यह मेला महर्षि भृगु के शिष्य दर्दर मुनी के नाम पर हर साल लगता हैं।

कोरोना काल में भी यहाँ लोगों को हर तरह की सुविधा का ख्याल रखा गया है। आपको बता दे कि शासन प्रशासन के साथ ही बलिया शहर में जगह-जगह पंण्डाल लगाये गए हैं। जिसमें सभी गंगा श्रद्धालु के लिए नि: शुल्क दवा ,चाय , पानी तथा मास्क की सुविधा उपलब्ध की गई है।

भृगु क्षेत्र के महर्षि भृगुमुनि के शिष्य दरदर मुनि के नाम पर पावन धरती पर सोमवार के तड़के से ही कार्तिक पूर्णिमा के महापर्व पर श्रद्धालुओं ने मोक्षदायिनी गंगा और अन्य सरोवर में लाखों की संख्या में डुबकी लगाई ।

इस पवित्र स्नान के लिए प्रशासनिक तैयारियां नगर पालिका सहित अन्य विभाग पूर्णिमा स्नान को पूरा करने मैं लगे रहे। प्रतिबंधित घाटों के आसपास बैरकेटिंग की गई जहां सुरक्षा बल तैनात रहे । विगत वर्षो की अपेक्षा श्रद्धालुओं की संख्या काफी कम रही।

सोमवार को तड़के शुरू हुए पूर्णिमा स्नान के अवसर पर श्रद्धालु गंगा, सरजू ,तमसा तथा अन्य पवित्र सरोवर में डुबकी लगाते रहे। स्नानार्थियों की सुविधा के लिए जगह जगह शौच घर बनाए गए। गंगा घाटों की सफाई भी की गई। लेकिन अपशिष्ट को गंगा के किनारे ही छोड़ दिया गया है।

विद्युत विभाग द्वारा घाटों तथा घाट तक पहुंचने के रास्ते पर प्रकाश की व्यवस्था की गई। गायत्री मंदिर से महावीर घाट तक नगर की गंदगी से निकले कचरे को छुपाने के लिए एक ओर हरे रंग की लंबी पट्टी घाट तक लगा दी गई। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस प्रशासन भी सुरक्षा व्यवस्था में सतर्क नजर आए। इस संबंध में यह भी देखने को मिला कि स्नान करने आए लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए देखे गए।

बाहर से आने वाले स्नानार्थिंयो की संख्या बेहद कम रही है। ट्रेनों के परिचालन कम होने से स्नान हेतु आने वाले स्नानार्थीयों की संख्या भी काफी कम रही। दिन भर स्नान का क्रम चलता रहा। स्नान करने के पश्चात अधिकतर लोग अपने निजी वाहनों बाईको से स्नान के पश्चात घर वापस जाते दिखे। रेलवे स्टेशन और कदम चौराहे पर खासी भीड़ नजर आई। इस बार का ददरी मेला कोविड-19 को देखते हुए एक साधारण रूप में ही लगा।

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