भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा परिसर में जैन समाज की ओर से सामूहिक क्षमावाणी महोत्सव का आयोजन किया गया। परम पूज्य आचार्य श्री 108 समय सागर जी महाराज के मंगल सानिध्य में हुए इस कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर की। कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, कैबिनेट मंत्री चैतन्य काश्यप समेत बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और जैन समाज के लोग उपस्थित रहे।
विधानसभा परिसर में आयोजित इस धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आचार्य श्री 108 समय सागर जी महाराज की मौजूदगी में दीप प्रज्ज्वलित किया। इस दौरान उन्होंने एक चित्र का लोकार्पण भी किया। कार्यक्रम में जैन समाज के संतों, पदाधिकारियों और समाजजनों ने सहभागिता की।
क्षमावाणी पर्व पर अपने संबोधन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार का नेतृत्व करते हुए अनेक महत्वपूर्ण फैसले लेने पड़ते हैं। कई बार सरकार के निर्णयों को लेकर कुछ लोग असहमति भी व्यक्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि उनके कार्यों या निर्णयों से प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से किसी को ठेस पहुंची हो या कोई भूल हुई हो, तो वे क्षमा प्रार्थी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि क्षमा अहंकार को समाप्त करने का माध्यम है और क्षमा वीरों का आभूषण मानी जाती है। उन्होंने क्षमावाणी पर्व को आत्ममंथन, विनम्रता और आपसी सौहार्द का अवसर बताया।
डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति प्रत्येक जीव के प्रति प्रेम, करुणा और सह-अस्तित्व की भावना का संदेश देती है। इसी सोच के अनुरूप प्रदेश सरकार वन्यजीवों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने बताया कि माधव नेशनल पार्क में टाइगर अभयारण्य के विकास के साथ-साथ सागर जिले में नए चीता अभयारण्य की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार का उद्देश्य है कि वन्यजीव अपने प्राकृतिक वातावरण में सुरक्षित और निर्भय होकर जीवन-चक्र पूरा कर सकें।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में गोपालन और दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करने की सरकार की प्रतिबद्धता भी दोहराई। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश को देश का अग्रणी दुग्ध उत्पादक राज्य बनाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में गोपालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि घर-घर गाय पालन को प्रोत्साहित करने के साथ गोपालकों के हित में भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए और अधिक प्रभावी बनाने का है।
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कार्यक्रम में उपस्थित जैन समाज के लोगों को क्षमावाणी पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि क्षमा, अहिंसा और आपसी सद्भाव भारतीय संस्कृति की मूल विशेषताओं में शामिल हैं। ऐसे पर्व समाज में भाईचारे और सकारात्मक सोच को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कैबिनेट मंत्री चैतन्य काश्यप ने क्षमावाणी पर्व को आत्मचिंतन का अवसर बताया। उन्होंने कहा कि यह पर्व आपसी मतभेद और वैमनस्य को समाप्त कर सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाने की प्रेरणा देता है। उन्होंने जैन समाज की अहिंसा और प्रत्येक जीव के प्रति करुणा की भावना की सराहना करते हुए कहा कि ‘जियो और जीने दो’ का संदेश आज के समाज के लिए भी बेहद प्रासंगिक है।
क्षमावाणी महोत्सव के दौरान अहिंसा, क्षमा, करुणा, सह-अस्तित्व और ‘जियो और जीने दो’ जैसे संदेशों को प्रमुखता दी गई। कार्यक्रम में जैन समाज के संतों, प्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में समाजजनों की मौजूदगी रही। आयोजन ने सामाजिक सौहार्द, आत्मचिंतन और परस्पर क्षमा की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया। विधानसभा परिसर में आयोजित इस महोत्सव के माध्यम से धार्मिक मूल्यों के साथ सामाजिक समरसता और जीवों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश भी सामने आया।