मध्य प्रदेश के Betul जिले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर सैकड़ों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने जिला मुख्यालय पर एकजुट होकर रैली निकाली और कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की और सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहिर की।
प्रदर्शन कर रही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे लंबे समय से नियमितीकरण और वेतन वृद्धि की मांग करती आ रही हैं, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। कार्यकर्ताओं के अनुसार वर्तमान में मिलने वाला मानदेय बेहद कम है, जिससे परिवार का पालन-पोषण करना कठिन हो गया है। उन्होंने मांग की कि उनका मानदेय बढ़ाकर कम से कम 32 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाए, ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें और पूरी निष्ठा से अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकें।
आंदोलन के दौरान पोषण ट्रैकर ऐप के लिए विभाग द्वारा दिए गए मोबाइल फोन भी बड़ा मुद्दा बने। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि वितरित किए गए मोबाइल फोन पूरी तरह अनुपयोगी हैं और उनमें ऐप ठीक से काम नहीं करता। तकनीकी खामियों के बावजूद काम का पूरा दबाव आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर ही डाला जाता है। किसी भी प्रकार की त्रुटि या डेटा संबंधी समस्या होने पर जिम्मेदारी भी उन्हीं पर तय कर दी जाती है। कई कार्यकर्ताओं ने बताया कि मजबूरी में उन्हें अपने निजी खर्च से नए मोबाइल फोन खरीदकर काम करना पड़ रहा है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया और खराब मोबाइल फोन बदलने के साथ-साथ वेतन वृद्धि व नियमितीकरण पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो संगठन उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में होने वाले किसी भी बड़े आंदोलन की जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। प्रदर्शन के बाद ज्ञापन सौंपते हुए कार्यकर्ताओं ने उम्मीद जताई कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना जाएगा और जल्द ही समाधान निकाला जाएगा।