पन्ना के दक्षिण पन्ना वनमंडल ने जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत एक सराहनीय पहल करते हुए प्राकृतिक जलस्रोतों को पुनर्जीवित किया है। भीषण गर्मी के बीच जहां जल संकट गहराता जा रहा है, वहीं इस प्रयास से वन्यजीवों और पक्षियों को बड़ी राहत मिली है।
रैपुरा रेंज के अंतर्गत रामडोल झिरिया और दाने बाबा झिरिया सहित करीब 225 प्राकृतिक जलस्रोतों की सफाई, गहरीकरण और मरम्मत कर उन्हें फिर से जीवित किया गया है। इससे सूखने की कगार पर पहुंचे कई जलस्रोतों में अब भी पानी उपलब्ध है।
इन जलस्रोतों के पुनर्जीवन से क्षेत्र की जैव विविधता को भी मजबूती मिली है। यहां मधुमक्खियों के प्राकृतिक छत्ते, पक्षियों के घोंसले और विभिन्न वन्यजीवों की सक्रिय मौजूदगी देखी जा रही है। किंगफिशर, मोर, उल्लू, बाज और अन्य कई पक्षी अब इन क्षेत्रों में सुरक्षित रूप से रह रहे हैं।
वन विभाग के इस प्रयास से छोटे जीवों, तितलियों और मधुमक्खियों के लिए भी पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है। पहले जहां गर्मियों में ये जलस्रोत सूख जाते थे, अब उनमें लंबे समय तक पानी बना रहने से पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को लाभ मिल रहा है।