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Amarwada By-Election: अमरवाड़ा उपचुनाव के लिए मतदान जारी, क्या छिंदवाड़ा में कांग्रेस करेगी वापसी या लगेगा झटका?

आज मध्य प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण दिन है क्योंकि छिंदवाड़ा की अमरवाड़ा विधानसभा सीट पर उपचुनाव हो रहा है। मतदान सुबह 7 बजे शुरू हुआ है और शाम 6 बजे तक जारी रहेगा, जिसमें 332 मतदान केंद्रों पर मतदाता अपने मत डालेंगे।

By Rekha 
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आज मध्य प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण दिन है क्योंकि छिंदवाड़ा की अमरवाड़ा विधानसभा सीट पर उपचुनाव हो रहा है। मतदान सुबह 7 बजे शुरू हुआ है और शाम 6 बजे तक जारी रहेगा, जिसमें 332 मतदान केंद्रों पर मतदाता अपने मत डालेंगे।

हर्रई विकासखंड में बहिष्कार
अमरवाड़ा विधानसभा अंतर्गत हर्रई विकासखंड के सलैया बुलाकी ग्राम पंचायत के डावरी झील गांव के निवासियों ने वोट का बहिष्कार किया है। वे बुनियादी ढांचे की कमी का विरोध करते हुए “रोड नहीं तो वोट नहीं” लेबल वाला एक बॉक्स लेकर मतदान स्थल पर पहुंचे।

अमरवाड़ा उपचुनाव में कमल नाथ की साख दांव पर

अमरवाड़ा उपचुनाव कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा है, जिसके मध्य प्रदेश में महत्वपूर्ण राजनीतिक निहितार्थ हैं। कमलेश शाह के भाजपा में शामिल होने के बाद से झेल रही कांग्रेस अपने गढ़ को फिर से हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है, जबकि भाजपा का लक्ष्य शाह को अपना उम्मीदवार बनाकर अपनी स्थिति मजबूत करना है।

बीजेपी उम्मीदवार:कमलेश शाह
पहले कांग्रेस विधायक रहे कमलेश शाह ने भाजपा में शामिल हो गए, जिससे उपचुनाव की नौबत आ गई। कांग्रेस से उनके इस्तीफे और उसके बाद दलबदल ने राजनीतिक परिदृश्य को नया आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भाजपा ने अमरवाड़ा सीट केवल एक बार जीती है, जिससे यह चुनाव उनके लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बन गया है।

कांग्रेस की प्रचार रणनीति
कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और प्रदेश प्रभारी जितेंद्र सिंह समेत अपने शीर्ष नेताओं को जोरदार प्रचार के लिए तैनात किया है. आदिवासी विधायकों को भी विभिन्न क्षेत्रों में समर्थन जुटाने के लिए रणनीतिक रूप से तैनात किया गया है। कांग्रेस के अभियान प्रयासों का उद्देश्य लोकसभा चुनावों में हुई हार को पलटना है, जहां जिले में पार्टी के पिछले प्रभुत्व के बावजूद नकुल नाथ हार गए थे।

उपचुनाव का महत्व
इस उपचुनाव के नतीजे तय करेंगे कि क्या कांग्रेस छिंदवाड़ा में वापसी कर सकती है या उसे बड़ा झटका लग सकता है। नतीजे क्षेत्र में कमल नाथ के प्रभाव और नेतृत्व पर भी असर डालेंगे। उम्मीदवार चयन और अभियान रणनीति में उनकी सीधी भागीदारी उनकी राजनीतिक प्रतिष्ठा के लिए उच्च दांव को रेखांकित करती है।

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