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इलाहाबाद हाईकोर्ट- अध्यापकों, शिक्षामित्रों को जबरन चुनावी टास्क पर लगाया गया, मृतकों के परिजनों मिले 1-1 करोड़ मुआवजा

By: RNI Hindi Desk 
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इलाहाबाद हाईकोर्ट- अध्यापकों, शिक्षामित्रों को जबरन चुनावी टास्क पर लगाया गया, मृतकों के परिजनों मिले 1-1 करोड़ मुआवजा

रिपोर्ट: सत्यम दुबे

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को पंचायत चुनाव में कोरोना महामारी से जान गंवाने वाले शिक्षकों के परिवार वालों को बड़ी राहत दी है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा मृतक शिक्षकों के परिजनों को दी जाने वाली सहायता राशि को नाकाफी बताया। इसके साथ ही राज्य चुनाव आयोग और सरकार से मृतक कर्मचारियों के परिजनों को एक-एक करोड़ मुआवजा देने पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया।

हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा कि अध्यापकों, शिक्षामित्रों को जबरन चुनावी टास्क पर लगाया गया, जिससे लोगों की मौत हुई। जबकि उनको दिया गया मुआवजा पर्याप्त नहीं है। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को जानकारी दी थी कि पंचायत चुनाव में जान गंवाने वाले कर्मचारियों के परिजनों को 35 लाख रुपये की सहायता राशि दे रही है। इस हाईकोर्ट ने कहा कि यह राशि बहुत कम है। इसे कम से कम-एक-करोड़ होना चाहिए। कोर्ट ने सरकार व आयोग से पहले में घोषित मुआवजे की राशि को वापस लेने को कहा है।

आपको बता दें कि कोरोना महामारी के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए कायम एक जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने हर जिले में 3 सदस्यीय पेन्डेमिक पब्लिक ग्रीवांस कमेटी गठित करने का निर्देश दिया है। इसके तहत जिला जज से नामित सीजेएम या न्यायिक मजिस्ट्रेट, मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य द्वारा नामित कोई प्रोफेसर, जहां कालेज न हो वहां लेबल फोर के जिला अस्पताल के किसी अधिकारी या एडीएम रैंक अधिकारी की कमेटी बने। इसे 48 घंटे में गठित करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही मुख्य सचिव को कहा है कि सभी जिलाधिकारियों को कमेटी गठन करने के संबंध में निर्देश जारी करें।

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने राज्य सरकार व सरकारी गैर सरकारी अस्पतालों को निर्देश दिया है कि जो कोविड संदिग्ध मौतें हो रही हैं भी कोरोना से हुई मौत माना जाये। कोई भी अस्पताल संदिग्ध मरीजों को गैर कोविड मरीज न समझे। यदि कोई सर्दी जुकाम से भर्ती हुआ है और रिपोर्ट नहीं आयी है और मौत हो जाती है तो ऐसी मौत को कोरोना मौत माना जाए।

हाईकोर्ट ने शर्त रखा कि हार्ट या किडनी की अन्य गंभीर समस्या को छोड़कर सभी मौतों को कोरोना स, हुआ मौत माना जायेगा। कोर्ट ऐसी मौत पर कोविड प्रोटोकॉल का दाह संस्कार में पालन कराने का भी आदेश दिया है। जबकि हाईकोर्ट ने कोरोना मरीजों की खुराक के लिए 100 रूपये तय करने पर नाराजगी जाताई है। कोर्ट ने कहा है कि इतने में कोरोना मरीज को पौष्टिक आहार नहीं दिया जा सकता है। कोर्ट ने सरकार को मांगी गयी जानकारी न देने पर फटकार लगायी है।

हाईकोर्ट ने सरकार से अस्पताल में आक्सीजन उत्पादन का व्यौरा मांगा है। जबकि 19 अप्रैल से 2 मई तक मौतों का आंकड़ा न देने पर सरकारा की खिंचाई करते हुए कहा कि जिले के नोडल अधिकारियों की रिपोर्ट कुछ और बताती है। इस मामले की अगली सुनवाई 17 मई को होगी। न्यायामूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायामूर्ति अजित कुमार की खंडपीठ ने ये आदेश दिया है।

 

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