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कृषि मंत्री तोमर का बड़ा बयान, जब नष्ट हो जाती है आंदोलन की पवित्रता तो नहीं होता निर्णय

By: Amit ranjan 
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कृषि मंत्री तोमर का बड़ा बयान, जब नष्ट हो जाती है आंदोलन की पवित्रता तो नहीं होता निर्णय

नई दिल्ली : किसान आंदोलन को लेकर सरकार और किसानों के बीच कुल 11 दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन किसी भी वार्ता का कोई भी नतीजा नहीं निकल सका। इन सभी वार्ताओं के दौरान किसानों के रूख से नाराज केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जब आंदोलन की पवित्रता नष्ट हो जाती हैं तो इसका कोई निर्णय नहीं होता।

तोमर ने कहा कि भारत सरकार की कोशिश थी कि वो सही रास्ते पर विचार करें जिसके लिए 11 दौर की वार्ता की गई। परन्तु किसान यूनियन क़ानून वापसी पर अड़ी रही। सरकार ने एक के बाद एक प्रस्ताव दिए। परन्तु जब आंदोलन की पवित्रता नष्ट हो जाती है तो निर्णय नहीं होता।

उन्होंने कहा कि भारत सरकार PM मोदी जी के नेतृत्व में किसानों और गरीबों के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है और रहेगी… विशेष रूप से पंजाब के किसान और कुछ राज्यों के किसान कृषि क़ानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। कृषि मंत्री ने कहा कि इस आंदोलन के दौरान लगातार ये कोशिश हुई कि जनता के बीच और किसानों के बीच गलतफहमियां फैलें। इसका फायदा उठाकर कुछ लोग जो हर अच्छे काम का विरोध करने के आदि हो चुके हैं, वे किसानों के कंधे का इस्तेमाल अपने राजनीतिक फायदे के लिए कर सकें।

वहीं किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार की तरफ से कहा गया कि 1.5 साल की जगह 2 साल तक कृषि क़ानूनों को स्थगित करके चर्चा की जा सकती है। उन्होंने कहा अगर इस प्रस्ताव पर किसान तैयार हैं तो कल फिर से बात की जा सकती है, कोई अन्य प्रस्ताव सरकार ने नहीं दिया।

एक अन्य किसान नेता ने कहा कि सरकार द्वारा जो प्रस्ताव दिया गया था वो हमने स्वीकार नहीं किया। कृषि क़ानूनों को वापस लेने की बात को सरकार ने स्वीकार नहीं की। अगली बैठक के लिए अभी कोई तारीख तय नहीं हुई है।

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