भोपाल। दतिया उपचुनाव में जीत दर्ज करने के बाद नवनिर्वाचित कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह पहली बार भोपाल पहुंचे। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान उपचुनाव से जुड़े कई अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी। घनश्याम सिंह ने कहा कि कांग्रेस की जीत का अंतर इससे कहीं अधिक होना चाहिए था। पार्टी ने करीब 15 से 20 हजार वोटों के अंतर से जीत का आकलन किया था, लेकिन कुछ परिस्थितियों के कारण जीत का मार्जिन कम रह गया।
चुनाव में प्रशासन की भूमिका को लेकर घनश्याम सिंह ने कहा कि उपचुनाव के दौरान प्रशासन पर काफी दबाव रहता है। उन्होंने जिला प्रशासन और कलेक्टर की भूमिका की तारीफ करते हुए कहा कि दबाव के बावजूद निष्पक्ष चुनाव कराने की कोशिश की गई। उन्होंने कुछ स्थानों पर बूथ कैप्चरिंग के प्रयास किए जाने का आरोप भी लगाया। हालांकि, उनके मुताबिक कांग्रेस कार्यकर्ताओं की सतर्कता और प्रशासन की निगरानी के कारण ऐसे प्रयास सफल नहीं हो सके।
घनश्याम सिंह ने अपनी व्यक्तिगत छवि को भी जीत का एक महत्वपूर्ण कारण बताया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1993 से चुनाव लड़ते हुए उनकी छवि साफ-सुथरी रही है। इसी वजह से पार्टी ने उन्हें सेवड़ा से बुलाकर दतिया से चुनाव मैदान में उतारा। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि सिर्फ व्यक्तिगत छवि के आधार पर चुनाव नहीं जीता जा सकता। इसके लिए मजबूत इलेक्शन मैनेजमेंट और बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता बेहद जरूरी है।
उन्होंने प्रदेश कांग्रेस कमेटी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के योगदान की भी सराहना की। घनश्याम सिंह ने बताया कि चुनाव के दौरान छोटे-छोटे सेक्टर बनाकर पूर्व मंत्रियों, विधायकों और पूर्व विधायकों को जिम्मेदारियां दी गई थीं। पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने क्षेत्र में रहकर पूरी मेहनत और समर्पण के साथ चुनाव अभियान चलाया।
राजेंद्र भारती के निष्कासन पर घनश्याम सिंह ने कहा कि पहले वह पार्टी के अंदर रहकर अपनी बात रखते थे, लेकिन मतदान से दो दिन पहले उन्होंने पार्टी के खिलाफ खुलकर गतिविधियां शुरू कर दी थीं। कार्यकर्ताओं की बैठक बुलाकर भाषण देने के बाद पार्टी को उनके खिलाफ कार्रवाई करनी पड़ी। उन्होंने राजेंद्र भारती को पुराना और प्रभावशाली नेता बताते हुए कहा कि इसके बावजूद कांग्रेस के मजबूत चुनावी प्रबंधन से पार्टी को जीत मिली।