मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा, तकनीकी एवं आयुष विभाग के अंतर्गत आने वाले कॉलेजों में नए शैक्षणिक सत्र से कई बड़े और महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेंगे। मध्यप्रदेश सरकार के दो वर्ष के कार्यकाल के अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री इंदरसिंह परमार ने ‘मिशन 2028’ का रोडमैप प्रस्तुत करते हुए इन सुधारों की जानकारी दी। सरकार का उद्देश्य कॉलेजों में शैक्षणिक गुणवत्ता, अनुशासन और तकनीक आधारित पारदर्शी व्यवस्था को मजबूत करना है।
मंत्री इंदरसिंह परमार ने बताया कि नए सत्र से सरकारी कॉलेजों में छात्रों की उपस्थिति अब सार्थक ऐप (Sarthak App) के माध्यम से दर्ज की जाएगी। अभी तक यह व्यवस्था केवल प्रोफेसरों तक सीमित थी, लेकिन अब विद्यार्थियों की अटेंडेंस भी डिजिटल रूप से अनिवार्य की जा रही है। इसका उद्देश्य कॉलेजों में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना और शैक्षणिक वातावरण को अनुशासित बनाना है।
शिक्षा नीति में बड़े बदलाव के तहत फर्स्ट ईयर के सिलेबस में भारतीय ज्ञान परंपरा (Bharatiya Gyan Parampara – BKP) को शामिल किया गया है। अगले शैक्षणिक सत्र से इसकी विधिवत पढ़ाई शुरू होगी। इससे छात्र भारत की प्राचीन शिक्षा परंपरा, दर्शन और शोध पर आधारित ज्ञान से परिचित हो सकेंगे।
सरकार द्वारा कुल 83 विषयों का नया सिलेबस तैयार किया गया है, जिसमें आधुनिक शिक्षा और भारतीय परंपरा का संतुलित समावेश किया गया है।
परीक्षा व्यवस्था को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए कॉपियों की जांच प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन (Digital Evaluation) किया जा रहा है। अब परीक्षकों को उत्तर पुस्तिकाएं डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे मूल्यांकन में समय की बचत होगी और छात्रों को परिणाम भी अपेक्षाकृत जल्दी मिल सकेंगे।
मंत्री ने कहा कि मिशन 2028 के अंतर्गत सरकार का फोकस कॉलेज शिक्षा को तकनीक-आधारित, अनुशासित और गुणवत्तापूर्ण बनाने पर है। अटेंडेंस, सिलेबस और मूल्यांकन-तीनों स्तरों पर किए जा रहे ये बदलाव मध्यप्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देंगे। सार्थक ऐप से अटेंडेंस, भारतीय ज्ञान परंपरा को सिलेबस में शामिल करना और डिजिटल मूल्यांकन जैसे फैसले यह संकेत देते हैं कि मध्यप्रदेश सरकार कॉलेज शिक्षा को आधुनिक तकनीक और भारतीय मूल्यों के समन्वय से सशक्त बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।