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विकास और सेवा के 2 वर्ष: पशुपालन एवं डेयरी क्षेत्र में मध्यप्रदेश की बड़ी उपलब्धियाँ

पशुपालन एवं डेयरी विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल ने बताया कि मध्यप्रदेश में दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहन देने के लिए किए गए सतत प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

By: Abhinav Tiwari 
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विकास और सेवा के 2 वर्ष: पशुपालन एवं डेयरी क्षेत्र में मध्यप्रदेश की बड़ी उपलब्धियाँ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और यशस्वी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार ने पशुपालन एवं डेयरी क्षेत्र में बीते दो वर्षों के दौरान उल्लेखनीय प्रगति की है। इन प्रयासों का सीधा लाभ ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पशुपालकों की आय और किसानों की आत्मनिर्भरता के रूप में सामने आ रहा है। पशुपालन एवं डेयरी विभाग की उपलब्धियाँ इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार ने विकास, सुशासन और जनकल्याण को प्राथमिकता देते हुए योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाया है।

दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा, रोज़ 12 लाख लीटर दूध का संकलन

पशुपालन एवं डेयरी विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल ने बताया कि मध्यप्रदेश में दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहन देने के लिए किए गए सतत प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। वर्तमान में दुग्ध समितियों के माध्यम से प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 12 लाख लीटर दूध का संग्रहण किया जा रहा है, जिससे हजारों दुग्ध उत्पादकों को नियमित आय का स्रोत मिला है।

पशुपालन बना ग्रामीण आजीविका का मजबूत आधार

प्रदेश सरकार का निरंतर प्रयास रहा है कि पशुपालन को ग्रामीण आजीविका का सशक्त आधार बनाया जाए। बीते दो वर्षों में पशु स्वास्थ्य, नस्ल सुधार, दुग्ध उत्पादन और विपणन के क्षेत्र में प्रभावी सुधार किए गए हैं। इन पहलों से पशुपालकों की आमदनी बढ़ी है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है।

गौसंवर्धन को सर्वोच्च प्राथमिकता

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में गौ संरक्षण और संवर्धन के संकल्प को ठोस रूप मिला है। प्रदेश की 2500 से अधिक गौशालाओं में 4.75 लाख से अधिक निराश्रित गौवंश को आश्रय दिया जा रहा है। गौशालाओं को मिलने वाला अनुदान ₹20 से बढ़ाकर ₹40 प्रति गौवंश प्रतिदिन कर दिया गया है। इसके साथ ही इस मद का वार्षिक बजट ₹250 करोड़ से बढ़ाकर ₹505 करोड़ किया गया है, जिससे गौशालाओं की व्यवस्थाएं और संचालन मजबूत हुआ है।

‘स्वावलंबी गौशालाएं नीति-2025’ से स्थायी समाधान

निराश्रित गौवंश के स्थायी समाधान के लिए प्रदेश सरकार ने ‘स्वावलंबी गौशालाएं (कामधेनु निवास) स्थापना नीति-2025’ लागू की है। इस नीति के अंतर्गत पंचगव्य उत्पाद, बायोगैस, जैविक खाद, दुग्ध प्रसंस्करण, सौर ऊर्जा और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में रोजगार और निवेश के नए अवसर सृजित होंगे। प्रत्येक परियोजना से सीएनजी और उन्नत जैविक खाद का उत्पादन होगा, जिससे किसानों और पशुपालकों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

गौवंश संरक्षण के लिए सख्त कानून

गौवंश संरक्षण को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश गौवंश वध प्रतिषेध (संशोधन) अधिनियम-2024 लागू किया गया है। इसके तहत गौवंश के अवैध परिवहन में प्रयुक्त वाहनों को राजसात करने का प्रावधान किया गया है, जिससे अवैध गतिविधियों पर सख्ती से रोक लगेगी।

सांची ब्रांड और सहकारिता को मिला नया बल

सहकारिता के माध्यम से दुग्ध संकलन और प्रसंस्करण को सशक्त किया गया है। सांची ब्रांड के सुदृढ़ीकरण के लिए एनडीडीबी (NDDB) के साथ सहयोग समझौता किया गया है। दुग्ध उत्पादकों के लिए दूध खरीद मूल्य में ₹2.50 से ₹8.50 प्रति लीटर तक की वृद्धि की गई है और उन्हें नियमित भुगतान सुनिश्चित किया गया है, जिससे उनकी आय में स्थायी बढ़ोतरी हुई है।

दुग्ध उत्पादन दोगुना करने की दिशा में नवाचार

प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को दोगुना करने के लक्ष्य के साथ ब्रीडर एसोसिएशन, ‘हिरण्यगर्भा अभियान’ जैसे नवाचार शुरू किए गए हैं। इन पहलों से नस्ल सुधार, कृत्रिम गर्भाधान और पशु स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा मिला है, जिसका सीधा लाभ पशुपालकों को मिल रहा है।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में सशक्त कदम

पशुपालन एवं डेयरी विभाग की ये उपलब्धियाँ न केवल पशुपालकों और किसानों की आय बढ़ा रही हैं, बल्कि मध्यप्रदेश की समग्र अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती प्रदान कर रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार की यह विकास यात्रा आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक सशक्त और प्रेरणादायी कदम के रूप में सामने आई है।

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